Gandhi Jayanti 2026: गांधी जयंती के अवसर पर पूरा देश महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दे रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर राजघाट जाकर गांधी जी को पुष्पांजलि अर्पित की। इनके अलावा उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी गांधी जी को श्रद्धांजलि दी।
वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी राजघाट जाकर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी गांधी जी को श्रद्धांजलि दी। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू भी महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर गांधी समाधि, राजघाट पर ‘सर्व-धर्म प्रार्थना’ में शामिल हुए। कई अन्य नेताओं ने भी गांधी को श्रद्धांजलि दी है।
लाल बहादुर शास्त्री को भी दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर विजय घाट पर श्रद्धांजलि दी। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर विजय घाट पर श्रद्धांजलि दी। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर विजय घाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
जेपी नड्डा ने लगाई झाड़ू
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-1 के समीप श्रमदान किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में हिस्सा लिया और लोगों से शहर को साफ़-सुथरा रखने की अपील की।
द्रौपदी मुर्मू बोलीं- गांधी जी से प्रेरणा लें लोग
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध एवं संघर्ष के माहौल के बीच उनका शांति और अहिंसा का संदेश अधिक प्रासंगिक हो गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों का वैश्विक समुदाय व्यापक रूप से सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय द्वारा गांधीजी के जीवन और आदर्शों को बहुत सम्मान दिया जाता है। आज विश्व के अनेक क्षेत्रों में अशांति और युद्ध का वातावरण है तथा सभी देशों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थितियों में महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं










