Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां जादोपुर थाने में तैनात तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम और उनके सहयोगियों पर निर्दोष नागरिकों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और उनसे मोटी रकम ऐंठने का गंभीर आरोप लगा है। एसपी विनय तिवारी के सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्टाचार में लिप्त चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 16 अगस्त का है, जब कुछ लोगों ने एसपी को शिकायत की कि जादोपुर थाने में निर्दोष लोगों को डरा-धमकाकर अवैध हिरासत में रखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनय तिवारी ने तुरंत डीएसपी मुख्यालय को जांच का आदेश दिया। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसमें पुलिस की मिलीभगत से चल रही वसूली का काला खेल उजागर हुआ।
जांच में पता चला कि पुलिसकर्मियों ने जितन राम, विजय राम, शंकर राम समेत एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या प्राथमिकी दर्ज किए 36 घंटे तक थाने में कैद रखा था। आरोप है कि इन लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर पहले 50 हजार रुपये की वसूली की गई। इसके बाद महिला और उसकी बेटी को छोड़ने के नाम पर 75 हजार रुपये और नाम हटाने की एवज में अतिरिक्त 55 हजार रुपये की मांग की गई।
इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम के साथ चौकीदार राजू यादव, राकेश कुमार और थाने के एक बिचौलिए महंथ कुमार यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इतना ही नहीं, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने गवाहों को डराने और मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की थी, जिससे कानून का शासन पूरी तरह खतरे में पड़ गया था।
पुलिस कप्तान विनय तिवारी ने इस घटना पर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि विभाग में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली और मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, जादोपुर थाना कांड संख्या 185/2026 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गोपालगंज पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की इलाके में चर्चा है और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।











