Delhi News: मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के पद पर कार्यरत जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनके इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। कुरियन के इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के पीछे का मुख्य कारण उनका राज्यसभा सदस्य न रहना बताया जा रहा है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 24 जून 2026 को समाप्त हो गया था। संवैधानिक प्रावधानों के तहत, यदि कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह लंबे समय तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रह सकता। इसी नियम का पालन करते हुए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
केरल भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में अपनी पहचान रखने वाले 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन पार्टी के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं। उन्होंने साल 1980 में भाजपा की स्थापना के समय से ही संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने केरल में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने और ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
कुरियन को जून 2024 में मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की नई रणनीतियों के तहत उन्हें राज्यसभा के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें यह इस्तीफा देना पड़ा।
अपने राजनीतिक सफर में जॉर्ज कुरियन ने केरल भाजपा के उपाध्यक्ष, प्रवक्ता और अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पदों पर काम किया है। इसके अलावा, वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। फिलहाल उनके इस्तीफे को लेकर भाजपा की ओर से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन उनके इस्तीफे से केरल की राजनीति में समीकरणों के बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
Author: Shivam Verma
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