West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए ‘महापरिवर्तन’ के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है, जिन्हें पिछली सरकार के करीबी के तौर पर देखा जाता था। इसी क्रम में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है।
ईडी की इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। शांतनु सिन्हा बिस्वास पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और कथित रंगदारी सिंडिकेट से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर एक विशेष राजनीतिक दल के हितों को साधने के आरोप भी लगे हैं।
पांच समन के बावजूद जांच में शामिल नहीं हुए
ईडी पिछले काफी समय से शांतनु सिन्हा बिस्वास से पूछताछ करना चाह रही थी। एजेंसी ने उन्हें कई बार समन भेजे, लेकिन उन्होंने लगातार पांच समन की अनदेखी की। इसके बाद जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया।
ईडी को आशंका थी कि बिस्वास देश छोड़कर फरार हो सकते हैं, जिसके चलते सभी एयरपोर्ट और बंदरगाहों को अलर्ट पर रखा गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि बिस्वास जांच में सहयोग करने के बजाय लगातार टालमटोल कर रहे थे, जिसके बाद सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।
ममता बनर्जी से करीबी को लेकर बढ़ा विवाद
शांतनु सिन्हा बिस्वास को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते हुए देखा गया था। उस समय विपक्षी दलों ने पुलिस अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से सफाई दी गई थी कि वे वहां सुरक्षा कारणों से मौजूद थे। अब सत्ता परिवर्तन के बाद उन फाइलों को फिर से खोला गया है, जिनमें उनके कार्यकाल के दौरान हुए कथित घोटालों का उल्लेख था।
परिवार तक पहुंची जांच की आंच
ईडी की जांच अब केवल शांतनु सिन्हा बिस्वास तक सीमित नहीं रही है। एजेंसी ने उनके दोनों बेटों सयंतन और मनीष को भी पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि बिस्वास ने अपने पद का फायदा उठाकर बेटों के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित की। ईडी की टीम ने जब बालीगंज स्थित फर्न रोड आवास पर छापेमारी की थी, तब वहां से कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, बेटों के जांच में शामिल नहीं होने के बाद अब उन पर भी कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
‘सोना पप्पू’ कनेक्शन से बढ़ीं मुश्किलें
शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप स्थानीय अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ से जुड़े हैं। सोना पप्पू पर हत्या की कोशिश और जबरन वसूली जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि बिस्वास और व्यवसायी जॉय कामदार, जो सन एंटरप्राइज के एमडी बताए जाते हैं, ने कथित तौर पर इस अपराधी सिंडिकेट को संरक्षण दिया। आरोप है कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को इधर-उधर किया गया।
ईडी की पहले की छापेमारी में करीब 1.47 लाख रुपये नकद, 67 लाख रुपये से अधिक के जेवरात और एक अवैध देसी पिस्तौल बरामद हुई थी। यह बरामदगी अब जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सबूत मानी जा रही है।
पुलिस कल्याण समिति में भूमिका भी जांच के दायरे में
शांतनु सिन्हा बिस्वास केवल डीसीपी पद तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण समिति के मुख्य समन्वयक और नोडल अधिकारी जैसे अहम पदों पर भी तैनात रह चुके हैं। ईडी को शक है कि इन जिम्मेदार पदों पर रहते हुए पुलिस फंड और अन्य योजनाओं में भी कथित हेराफेरी की गई। नई सरकार बनने के बाद पुलिस विभाग के भीतर उन अधिकारियों की पहचान की जा रही है, जिन पर सत्ता के प्रभाव में काम करने के आरोप हैं।
शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी को इस बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में बंगाल की अफसरशाही से जुड़े कई और मामलों में भी कार्रवाई हो सकती है।
Author: Shivam Verma
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