World News: भारत में अमेरिकी राजदूत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में आज लद्दाख पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा सामरिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लद्दाख की यह यात्रा न केवल भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र में चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी है।
दौरे के मुख्य आकर्षण के रूप में सर्जियो गोर लेह के शेवतसेल टीचिंग ग्राउंड में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाकात करेंगे। इस उच्च-स्तरीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। चूंकि चीन दलाई लामा को लेकर संवेदनशील रहा है और अक्सर ऐसी मुलाकातों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है, ऐसे में अमेरिकी राजदूत की यह मुलाकात बीजिंग को असहज करने के लिए पर्याप्त है।
साल 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का लद्दाख का यह पहला दौरा है। यह कदम एलएसी पर स्थिति को यथावत रखने की भारत की कोशिशों के प्रति अमेरिका के समर्थन को प्रदर्शित करता है। विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन अब भारतीय सीमाओं पर मंडरा रहे सुरक्षा खतरों को समझने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जो चीन के लिए किसी बड़े कूटनीतिक संकेत से कम नहीं है।
इस यात्रा से पहले बुधवार को सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था, जिसने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है। घाटी के दौरे के बाद अब लद्दाख जाकर अमेरिकी दूत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को कितनी गंभीरता से ले रहा है। लद्दाख की यह यात्रा आने वाले समय में भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
हालांकि इस बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे एक निजी और प्रभावशाली कूटनीतिक भेंट माना जा रहा है। लेह के कठिन भौगोलिक और सामरिक महत्व वाले क्षेत्र में गोर की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष को मजबूती देने के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार है। फिलहाल चीन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन लद्दाख में बढ़ रही इस हलचल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।











