Maharashtra BMC Election: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों ने एक बार फिर देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में पार्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति का मिजाज बदला, बल्कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिकाओं में से 12 शहरों में AIMIM ने कुल 126 सीटें जीतकर सभी को हैरान कर दिया। यह सफलता केवल मराठवाड़ा के मुस्लिम इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और मुंबई तक फैली। मालेगांव, संभाजीनगर और नांदेड़ जैसे शहरों में पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मुस्लिम बहुल मालेगांव में AIMIM किंगमेकर बनकर उभरी, जबकि संभाजीनगर में वह मुख्य विपक्षी दल के रूप में सामने आई।
महाराष्ट्र में ‘छुपे रुस्तम’ बने ओवैसी
इन चुनावों में AIMIM का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन संभाजीनगर (औरंगाबाद) में रहा, जहां 33 पार्षद चुने गए। मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14, अमरावती में 12, धुले में 10, सोलापुर में 8, मुंबई में 8, नागपुर में 6, ठाणे में 5, अकोला में 3, अहिल्यानगर में 2 और जालना में 2 सीटें जीतकर पार्टी ने मराठवाड़ा से लेकर विदर्भ और मुंबई तक अपना सियासी दायरा बढ़ाया।
बीएमसी चुनाव में AIMIM की जीत को सबसे बड़ा झटका समाजवादी पार्टी को लगा। गोवंडी, मानखुर्द और शिवाजी नगर जैसे मुस्लिम बहुल वार्डों में AIMIM ने जीत दर्ज की, जिन्हें सपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता था। सपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी का प्रभाव इस क्षेत्र में दो दशकों से रहा है, लेकिन इस बार समीकरण बदल गए। 2017 में सपा ने 4 सीटें जीती थीं, जबकि इस चुनाव में वह केवल 2 सीटों पर सिमट गई। इसके उलट AIMIM ने 8 सीटें जीतकर सपा की पकड़ कमजोर कर दी।
सपा बनाम AIMIM की सीधी लड़ाई
मुंबई में चुनावी मुकाबला इस बार सपा और AIMIM के बीच सीधा नजर आया। ओवैसी ने खुले मंचों से सपा नेतृत्व, खासकर अखिलेश यादव, पर निशाना साधा और दावा किया कि मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व मजबूत होगा तो सपा की राजनीति सिमट जाएगी। इस आक्रामक रुख का असर मुस्लिम बहुल इलाकों में साफ दिखाई दिया, जहां वोटों का ध्रुवीकरण सपा और AIMIM के बीच हुआ।
बिहार के मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM पहले ही पांच सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। उलेमाओं के विरोध के बावजूद पार्टी को मुस्लिम समुदाय का समर्थन मिला। महाराष्ट्र के नतीजों के बाद अब ओवैसी का फोकस उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ता दिख रहा है। उनकी नजर पहले पंचायत चुनावों और फिर 2027 के विधानसभा चुनावों पर है, खासकर पश्चिमी यूपी पर, जहां मुस्लिम आबादी 30 से 50 फीसदी तक है।
यूपी में सियासी हकीकत क्या कहती है?
हालांकि उत्तर प्रदेश में AIMIM की जमीनी ताकत अभी कमजोर मानी जाती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस के अनुसार, यूपी में ओवैसी के पास न तो मजबूत संगठन है और न ही कोई कद्दावर स्थानीय चेहरा। ऐसे में AIMIM को यहां अभी वोट काटने वाली पार्टी के रूप में देखा जाता है। बावजूद इसके, बिहार और महाराष्ट्र में मिली सफलता ने ओवैसी के लिए यूपी में नई रणनीति और नई संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं।











