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‘पीडीए आ रहा है…’ कहकर घिरे ओपी राजभर, अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर साधा निशाना

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OP Rajbhar on PDA: कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। अपनी बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले राजभर इन दिनों लगातार समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी एक जुबानी चूक राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।

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दरअसल, गाजीपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओम प्रकाश राजभर सरकार और गठबंधन की उपलब्धियां गिना रहे थे। इसी दौरान जोश में बोलते हुए उन्होंने “एनडीए” की जगह “पीडीए आ रहा है” कह दिया। “पीडीए” समाजवादी पार्टी का प्रमुख राजनीतिक नारा माना जाता है, जो पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के समीकरण को दर्शाता है। जैसे ही यह शब्द उनके मुंह से निकला, वहां मौजूद नेता और पत्रकार भी कुछ पल के लिए चौंक गए।

बेदी राम ने तुरंत दिलाई गलती की याद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजभर के बगल में बैठे बेदी राम ने तुरंत उन्हें कोहनी मारकर गलती का एहसास कराया। इसके बाद राजभर ने अपनी बात संभालते हुए “एनडीए” कहा, लेकिन तब तक पूरा घटनाक्रम कैमरों में रिकॉर्ड हो चुका था।

कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्ष ने इसे सत्तारूढ़ गठबंधन पर तंज कसने का मौका बना लिया।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिया निशाने पर

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “सच अपने आप निकलता है और झूठ सोचकर बोला जाता है।”

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “आपने सच कहा, सही कहा पीडीए आ रहा है।” उन्होंने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि राजभर के मन में कहीं न कहीं अब भी पीडीए ही बसा हुआ है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वे अलग रुख अपनाए हुए हैं।

बयान के बाद तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी समर्थकों का कहना है कि ओम प्रकाश राजभर लंबे समय तक अखिलेश यादव के साथ राजनीति कर चुके हैं, इसलिए उनके अवचेतन मन में अब भी वही राजनीतिक सोच मौजूद है।

वहीं, राजभर समर्थकों ने इस पूरे मामले को महज जुबान फिसलने की घटना बताया है। उनका कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

हालांकि, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि राजनीति में शब्दों और बयानों का कितना महत्व होता है। एक छोटी सी चूक भी विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकती है। खासतौर पर ऐसे समय में जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और हर बयान का राजनीतिक विश्लेषण किया जा रहा है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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