Translate Your Language :

Home » पश्चिम बंगाल » नौकरानी से ड्राइवर के बेटे तक बने विधायक, बंगाल से तमिलनाडु तक कई आम चेहरों ने बदली राजनीति की तस्वीर

नौकरानी से ड्राइवर के बेटे तक बने विधायक, बंगाल से तमिलनाडु तक कई आम चेहरों ने बदली राजनीति की तस्वीर

Facebook
X
WhatsApp

West Bengal: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनाव परिणाम केवल राजनीतिक बदलाव की कहानी नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के असाधारण साहस और संघर्ष का जीवंत उदाहरण भी बनकर सामने आए हैं। पांच राज्यों में हुए चुनावों में कुछ ऐसे चेहरे उभरे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, संघर्ष और जनता के भरोसे के दम पर राजनीति में नई पहचान बनाई है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

इन चुनावों ने यह संदेश दिया है कि अब राजनीति सिर्फ बड़े परिवारों या प्रभावशाली नेताओं तक सीमित नहीं रही। जमीनी स्तर से उठने वाली आवाजें भी सत्ता के गलियारों तक पहुंच सकती हैं।

घरों में काम करने वाली कलिता माझी बनीं विधायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में ऑसग्राम (एससी) सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी ने जीत दर्ज कर लोकतंत्र की ताकत को नई पहचान दी।

कलिता माझी घरों में बर्तन मांजने और घरेलू काम करके हर महीने करीब 2500 रुपये कमाती हैं। बताया जाता है कि चुनाव प्रचार के दौरान भी वह लोगों के घरों में काम करती रहीं। हालांकि, स्थानीय लोगों ने उन्हें प्रचार पर ध्यान देने की सलाह दी और उनका पूरा समर्थन किया। उनकी जीत को आम लोगों के संघर्ष और भरोसे की जीत माना जा रहा है।

संदेशखाली की आवाज बनीं रेखा पात्रा

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना की रहने वाली रेखा पात्रा भी इस चुनाव में चर्चा का बड़ा चेहरा रहीं। गृहिणी से राजनीति तक का उनका सफर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। रेखा पात्रा ने संदेशखाली में हिंसा, उत्पीड़न और जमीन विवाद से जुड़े कथित मामलों पर खुलकर आवाज उठाई थी। पीड़ित महिलाओं का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने और जवाबदेही की मांग करने के बाद उनका नाम राज्य के बाहर भी सुर्खियों में आया।

उनका चुनाव प्रचार मुख्य रूप से सुशासन, महिलाओं की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा।

बेटी को न्याय दिलाने के लिए राजनीति में उतरीं रत्ना देबनाथ

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म के बाद हत्या की शिकार हुई पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने भी न्याय की लड़ाई को राजनीति के माध्यम से आगे बढ़ाने का फैसला किया। भाजपा ने उन्हें पनिहाटी सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार को 28 हजार से अधिक वोटों से हराया।

रत्ना देबनाथ ने चुनाव के दौरान कहा था कि उन्होंने राजनीति में आने का फैसला इसलिए किया, ताकि अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई जारी रख सकें और पानिहाटी को बुरे लोगों से दूर रखा जा सके।

तमिलनाडु में ड्राइवर के बेटे की जीत चर्चा में

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। टीवीके प्रमुख विजय के ड्राइवर के बेटे आर सबरीनाथन ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। मार्च महीने में जब टीवीके अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रही थी, तब विजय ने स्वयं राजेंद्रन के बेटे सबरीनाथन को विरुगंबक्कम सीट से टिकट सौंपा था। उस समय राजेंद्रन भी मंच पर मौजूद थे।

टिकट मिलने के दौरान सबरीनाथन काफी भावुक नजर आए थे। अब उनकी जीत को आम परिवारों के युवाओं के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

Description

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें