Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्राचीन भारतीय ज्ञान और संस्कृति से जुड़ा एक बेहद प्रेरणादायक सुभाषित साझा किया है। उनके इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर शिक्षा और संस्कारों को लेकर एक सार्थक चर्चा शुरू हो गई है। देश के प्रधानमंत्री अक्सर अपने संदेशों के जरिए भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देते नजर आते हैं।
अपने इस लेटेस्ट पोस्ट में पीएम मोदी ने प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ ‘हरिहर सुभाषितम्’ के एक विशेष श्लोक का उल्लेख किया है। यह श्लोक मनुष्य के जीवन में शिक्षा के महत्व और उसके प्रभावों को बहुत ही सुंदर तरीके से परिभाषित करता है। उन्होंने श्लोक साझा करते हुए इसके गहरे अर्थ को भी पाठकों के सामने रखा है, जो हर किसी के जीवन के लिए मार्गदर्शक का काम कर सकता है।
इस श्लोक का सरल शब्दों में अर्थ यह है कि विद्या न केवल इंसान को समाज में रहने के तौर-तरीके सिखाती है, बल्कि उसे ज्ञान और समृद्धि के मार्ग पर भी आगे बढ़ाती है। यह मनुष्य के चित्त को प्रसन्न रखती है और समाज में उसके मान-सम्मान को और अधिक ऊंचा उठाती है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित में विद्या की तुलना एक बेहतरीन सुशासन व्यवस्था से की गई है।
संस्कृत साहित्य में सुभाषितों का एक अलग ही और अनमोल स्थान रहा है। इनमें जीवन जीने की कला, नैतिकता और सफलता के कई गुप्त सूत्र छिपे होते हैं। ‘सुभाषित’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही सुंदर और मधुर वचन होता है, जो भटके हुए इंसान को सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं। प्रधानमंत्री का इन ग्रंथों की पंक्तियों को लगातार साझा करना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास माना जा रहा है।
गौरतलब है कि पीएम मोदी इससे पहले भी कई बार अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से इस तरह के अनमोल श्लोक और संदेश साझा करते रहे हैं। चाहे वह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने वाले वैदिक मंत्र हों या फिर जीवन की सीख देने वाले ज्ञानवर्धक श्लोक, उनके ये संदेश हमेशा से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहते हैं और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
Author: Shivam Verma
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