Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद प्रेरणादायक सुभाषित साझा किया है, जो जीवन जीने के सही नजरिए को दर्शाता है। पीएम मोदी ने संस्कृत के श्लोक, “उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥” के माध्यम से बताया है कि यदि व्यक्ति उत्तम स्वभाव के लोगों की संगति में रहे, विद्वानों के साथ चर्चा करे और निर्लोभी व निःस्वार्थ व्यक्तियों को अपना मित्र बनाए, तो वह कभी भी दुःखी नहीं होता।
प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में लगातार कई ऐसे विचार साझा किए हैं, जो समाज में सकारात्मकता और सेवा भाव को प्रेरित करते हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में उल्लेख किया है कि करुणा और संतोष का भाव न केवल मनुष्य को आंतरिक खुशी देता है, बल्कि समाज में सहयोग के बंधन को भी मजबूती प्रदान करता है। उनके अनुसार, दूसरों के प्रति दयालु होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और लालच का त्याग करने से मन को सच्ची शांति मिलती है।
इससे पूर्व भी प्रधानमंत्री ने नदियों के अविरल प्रवाह का उदाहरण देते हुए राष्ट्र को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि जिस तरह नदियां बिना किसी स्वार्थ के निरंतर बहते हुए मानवता का कल्याण करती हैं, उसी तरह मनुष्यों को भी अपने सामर्थ्य का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए। निःस्वार्थ सेवा और समर्पण को उन्होंने मानव जीवन की सार्थकता का मुख्य आधार बताया है।
पीएम मोदी के इन विचारों का उद्देश्य लोगों को जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। वे अक्सर प्राचीन भारतीय ज्ञान और सुभाषितों के जरिए युवाओं और आम नागरिकों को यह सिखाने का प्रयास करते हैं कि कैसे हम छोटी-छोटी चीजों को बदल कर अपने जीवन को और भी अधिक गरिमामय और सार्थक बना सकते हैं।
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी द्वारा शेयर किए गए ये विचार बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। उनके अनुयायी इन सीखों को न केवल साझा कर रहे हैं, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन में उतारने का संकल्प भी ले रहे हैं। प्रधानमंत्री की यह अनूठी शैली उन्हें आम जनता से सीधे जोड़ने और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।











