रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्ष की आंच अब समुद्र में सफर कर रहे वाणिज्यिक जहाजों तक पहुंच गई है। हाल ही में काला सागर यानी ब्लैक सी में एक बड़ा हादसा टल गया, जब रूसी तट के नजदीक लाइबेरियाई झंडे वाले एक तेल टैंकर को यूक्रेनी नेवल ड्रोन ने निशाना बनाया। इस खतरनाक हमले के तुरंत बाद जहाज पर मौजूद कच्चे तेल में भयानक आग लग गई, जिससे पूरे समुद्री इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सबसे राहत भरी खबर यह है कि इस गंभीर हमले की चपेट में आने वाले तेल टैंकर पर कुल 23 भारतीय नाविक सवार थे, जिन्हें पूरी तरह से सुरक्षित बचा लिया गया है। रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार यह घटना रूस के प्रसिद्ध रिसॉर्ट शहर सोची के पास घटी। हमला इतना जोरदार था कि समुद्री पानी और जहाज पर फैला तेल तेजी से सुलग उठा और आसमान में ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। प्रारंभिक कठिनाइयों के बाद स्थानीय आपातकालीन टीमों ने आग पर काबू पाया।
समुद्री मार्गों पर नाविकों के लिए यह हफ्ता बेहद तनावपूर्ण रहा है क्योंकि ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों पर हमलों की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। इस घटना से ठीक एक दिन पहले रोमानियाई तट के पास एक अन्य मालवाहक जहाज डूब गया था, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी और तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए थे। रोमानिया में तैनात भारतीय राजदूत ने अस्पताल पहुंचकर घायल नाविकों से मुलाकात की और उन्हें सरकार की तरफ से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन लगातार हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस तरह के हमलों से वैश्विक व्यापार और समुद्र में काम करने वाले कर्मचारियों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। भारत सरकार शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और लगातार कूटनीतिक माध्यमों से शांति स्थापित करने की अपील कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2022 से शुरू हुई इस जंग ने ब्लैक सी को एक खतरनाक युद्धक्षेत्र में बदल दिया है। एक तरफ रूस यूक्रेनी ठिकानों और अनाज ले जाने वाले जहाजों को रोक रहा है, तो दूसरी तरफ यूक्रेन भी रूसी तेल और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया भर के देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।










