World News: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खुल गई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन के दौरान भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। उन्होंने वैश्विक मंच पर एक बार फिर गीदड़भभकी देते हुए भारत को युद्ध की चेतावनी तक दे डाली। हालांकि, उनके इस बेतुके और भड़काऊ बयानों का भारत की तरफ से बहुत ही कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी हो गई।
भारतीय प्रतिनिधि ने यूएन में ‘राइट टू रिप्लाई’ का अधिकार इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को बेनकाब किया। भारत की तरफ से साफ कहा गया कि जो देश खुद आतंकवाद का गढ़ रहा है, उसे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। इस दौरान पाकिस्तान के चुनावों में धांधली का प्रतीक बन चुके ‘फॉर्म-47’ का जिक्र करते हुए वहां की राजनीतिक व्यवस्था और सेना के नियंत्रण पर भी सवाल उठाए गए, जिसने पाकिस्तानी हुक्मरानों को सकते में डाल दिया.
संयुक्त राष्ट्र के हॉल में करारा जवाब मिलने से पहले ही शहबाज शरीफ को बाहर मीडिया के तीखे तेवर का सामना करना पड़ा। जब पत्रकारों ने उन्हें घेरकर आतंकवाद को पनाह देने और कुख्यात आतंकवादी हाफिक सईद को लेकर सीधे और कड़े सवाल पूछे, तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की बोलती बंद हो गई। कैमरे के सामने इन गंभीर मुद्दों पर सफाई देने के बजाय शहबाज शरीफ बिना एक भी शब्द बोले वहां से चुपचाप निकल गए।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर केवल झूठ और खोखले दावों के सहारे प्रोपेगैंडा फैलाना चाहता है। जब बात जमीनी हकीकत और आतंकवाद पर जवाब देने की आती है, तो पाकिस्तानी नेता मुंह चुराते नजर आते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते और देश विरोधी ताकतों को हर मंच पर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।










