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सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती, जंतर-मंतर पर तनाव और अभिजीत दीपके का छलका दर्द

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से चल रहा अनशन तब और गंभीर हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक के स्वास्थ्य में गिरावट और डिहाइड्रेशन के लक्षण मिलने के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार का उपचार या तरल पदार्थ लेने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे समर्थकों और डॉक्टरों के बीच चिंता बनी हुई है।

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इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सफदरजंग अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सोनम वांगचुक के साथ मौजूद डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं की जा रही है और न ही वकीलों को मिलने दिया जा रहा है। निजी डॉक्टरों ने सरकारी लैब की रिपोर्ट पर अविश्वास जताते हुए आरोप लगाया कि वांगचुक के पोटैशियम स्तर को लेकर भ्रामक जानकारी दी जा रही है। वहीं, वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल प्रशासन से उन्हें किसी निजी संस्थान में रेफर करने की मांग की है।

जंतर-मंतर पर स्थिति उस वक्त भावुक हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके मंच पर फूट-फूटकर रोने लगे। सोनम वांगचुक को हटाए जाने के विरोध में उन्होंने खुद भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। इसी दौरान एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। दीपके ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट भी हुई है, फिर भी वे आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं।

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने को बेहद निंदनीय करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कार्रवाई में शामिल सादी वर्दी वाले अधिकारियों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे देश भर में आक्रोश फैल रहा है।

भविष्य की रणनीति के बारे में बात करते हुए सोनम वांगचुक की पत्नी ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। यदि वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो निर्धारित योजना के अनुसार सोमवार को मार्च का नेतृत्व किया जाएगा। आंदोलनकारी अब भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं और प्रशासन उन्हें लगातार वहां से हटने की अपील कर रहा है, जिससे दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद बनी हुई है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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