Lord Shiva Marriage Story: हिमाच्छादित और निर्जन कैलाश पर्वत पर समाधि में लीन रहने वाले भगवान शिव को महायोगी और वैरागी के रूप में जाना जाता है। वे संसारिक आकर्षणों से दूर, तप और ध्यान में रमे रहने वाले देव थे। किंतु उनके जीवन में एक ऐसा महत्वपूर्ण परिवर्तन आया, जब उन्होंने वैराग्य का मार्ग छोड़कर गृहस्थ जीवन को अपनाया। इसी दिव्य प्रसंग की स्मृति में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
माता पार्वती से विवाह के पश्चात शिव कैलाश से उतरकर गंगा तट पर बसे काशी में निवास करने लगे। जहां कैलाश शीत, नीरव और एकांत का प्रतीक था, वहीं काशी जीवंत, उर्वर और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण नगरी मानी जाती है। यह परिवर्तन केवल स्थान परिवर्तन नहीं था, बल्कि जीवन-दृष्टि में आए गहरे बदलाव का संकेत भी था।
शिव ने विवाह क्यों किया?
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार राक्षस ताड़कासुर के वध के लिए शिव-पुत्र का जन्म आवश्यक था। देवताओं की प्रार्थना पर शिव का विवाह पार्वती से संपन्न हुआ, ताकि उनके पुत्र कार्तिकेय ताड़कासुर का संहार कर सकें।
हालांकि शिव के विवाह का आशय केवल ताड़कासुर-वध तक सीमित नहीं है। शिव स्वयं इच्छा, भूख और प्यास से परे थे। उन्हें किसी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं थी। फिर भी सृष्टि के संचालन के लिए संतुलन आवश्यक था। मनुष्य को जीवन में संसाधन, सुरक्षा और स्थिरता की आवश्यकता होती है।
शिव का गृहस्थ जीवन अपनाना इस बात का प्रतीक है कि केवल तप और त्याग ही जीवन का पूर्ण सत्य नहीं है। करुणा, जिम्मेदारी और संतुलन भी उतने ही आवश्यक हैं। उनका विवाह यह संदेश देता है कि आध्यात्मिकता और संसारिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक तत्व हैं।
शिव-शक्ति का मिलन
शिव और शक्ति का मिलन सृष्टि के मूल संतुलन का प्रतीक माना जाता है। देवी पार्वती ने शिव को यह बोध कराया कि संसार से पूर्ण विरक्ति ही संपूर्णता नहीं है। जीवन की आवश्यकताओं और मानव समाज की जिम्मेदारियों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उनके पुत्र गणेश बुद्धि और समृद्धि के प्रतीक हैं, जो जीवन की भौतिक आवश्यकताओं को संतुलित रूप से पूरा करने का संदेश देते हैं। वहीं कार्तिकेय शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक हैं, जो भय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का संकेत देते हैं।
कैलाश से काशी: जीवन-दृष्टि का परिवर्तन
कैलाश पर्वत तप, एकांत और वैराग्य का प्रतीक है, जबकि काशी जीवन, ऊर्जा और कर्म का प्रतीक मानी जाती है। शिव का कैलाश छोड़कर काशी को निवास स्थान बनाना यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक चेतना केवल एकांत में नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर भी संभव है।
शिव परिवार का स्वरूप यह सिखाता है कि त्याग और जिम्मेदारी, तप और करुणा, शक्ति और संवेदना—इन सभी का संतुलन ही पूर्ण जीवन की आधारशिला है। शिव का विवाह और उनका गृहस्थ जीवन यही गूढ़ संदेश देता है कि सच्ची आध्यात्मिकता दूसरों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें संतुलित रूप से पूरा करने में निहित है।
Author: Shivam Verma
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