World Rabies Day 2026: हर साल 28 सितंबर को दुनियाभर में ‘वर्ल्ड रेबीज डे’ मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस खतरनाक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है. इस साल इस खास दिन की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि रेबीज जैसी जानलेवा समस्या को केवल आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयासों से ही जड़ से खत्म किया जा सकता है. आंकड़ों पर गौर करें तो इंसानों में रेबीज फैलने के 99 प्रतिशत मामले आवारा या पालतू कुत्तों के काटने और खरोंचने की वजह से ही सामने आते हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब कोई जानवर काटता है या उसकी संक्रमित लार किसी खुले घाव, आंख या मुंह के संपर्क में आती है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है. हालांकि कुत्ते के अलावा बिल्लियां और कुछ अन्य स्तनधारी जीव भी इस वायरस के वाहक हो सकते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मामले कुत्तों से ही जुड़े होते हैं. खासकर 5 से 14 साल की उम्र के बच्चे इस भयानक संक्रमण का सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं, इसलिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
चिकित्सक बताते हैं कि एक बार रेबीज के नैदानिक लक्षण शरीर में प्रकट होने शुरू हो जाएं, तो इस बीमारी में मरीज की जान जाने का खतरा शत-प्रतिशत यानी 100 प्रतिशत तक होता है. संक्रमण शरीर में प्रवेश करने के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर दो से तीन महीने का समय लग सकता है, लेकिन वायरस के शरीर के किस हिस्से में प्रवेश किया है, इसके आधार पर यह अवधि एक हफ्ते से लेकर एक साल तक भी हो सकती है.
शुरुआती अवस्था में रेबीज के लक्षण काफी सामान्य प्रतीत होते हैं, जिसमें घाव वाली जगह पर हल्की चुभन, झुनझुनी, दर्द और बुखार जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. जैसे-जैसे यह घातक वायरस नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र के जरिए दिमाग और रीढ़ की हड्डी तक पहुंचता है, स्थिति गंभीर होने लगती है. इसके बाद मरीज को पानी से अत्यधिक डर लगने लगता है जिसे हाइड्रोफोबिया कहा जाता है, और कुछ मामलों में मरीज लकवाग्रस्त भी हो जाता है, जिससे अंततः मौत का जोखिम बढ़ जाता है.
चूंकि लक्षण दिखने से पहले रेबीज के संक्रमण का सटीक पता लगाने का कोई आसान तरीका नहीं है, इसलिए समय पर बचाव करना ही इसका एकमात्र इलाज है. यदि किसी को कुत्ता या अन्य जानवर काट ले, तो तुरंत उस घाव को बहते हुए साफ पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके अलावा तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर डॉक्टर की सलाह के मुताबिक समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और टीकाकरण का पूरा कोर्स जरूर पूरा करना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके.










