World News: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। अमेरिका के शीर्ष खुफिया अधिकारियों ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की अपनी साजिशों को और अधिक तेज कर दिया है। हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि कई खतरनाक और जानलेवा योजनाएं अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं। इस अहम खुलासे के बाद से अमेरिकी प्रशासन में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है.
इस संवेदनशील मामले को लेकर नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने एक उच्च स्तरीय मेमो जारी किया है। इस मेमो के जरिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ को ईरान की तरफ से मिल रहे खतरों से पूरी तरह अवगत कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नापाक साजिशें सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मध्य पूर्व समेत दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी अपने पैर पसार चुकी हैं, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
बढ़ते खतरे के मद्देनजर अमेरिका ने कड़े कूटनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सुरक्षा का हवाला देते हुए वाशिंगटन ने सऊदी अरब से अपने कई राजनयिकों को फौरन वापस बुला लिया है। इसके अलावा, रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ जेद्दा और दहरान के वाणिज्य दूतावासों से भी गैर-जरूरी स्टाफ को हटाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार सुरक्षा हालात की समीक्षा कर रहे हैं और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए यह फैसले लिए जा रहे हैं.
सऊदी अरब के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, जॉर्डन और कतर जैसे देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों में भी तैनात कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की गई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे तेवर भी सामने आए हैं, जिन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखने की बात कही है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक दूरियां और अधिक बढ़ सकती हैं.










