Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है। केवल चार कारोबारी सत्रों के भीतर ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट वैल्यूएशन में करीब 21 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी दर्ज की गई है। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती चिंताएं बताई जा रही हैं।
बाजार में इस हाहाकार के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में लगातार गहराता भू-राजनीतिक संकट है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ ही संभावित सैन्य संघर्षों की आशंका ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। इस अनिश्चितता के माहौल के चलते निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है, जिससे घरेलू शेयर बाजार से लगातार पैसा बाहर निकाला जा रहा है और चौतरफा बिकवाली हावी हो गई है.
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आया बेकाबू उछाल भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो कि पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। तेल महंगा होने से देश में आयात बिल बढ़ने के साथ-साथ महंगाई और कंपनियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है.
कारोबार के दौरान टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली और ये भारी गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, कुछ चुनिंदा शेयरों में मामूली खरीदारी भी हुई, लेकिन बड़े पैमाने पर बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि सेंसेक्स और निफ्टी लगातार लाल निशान पर बंद होने को मजबूर हो गए। कमजोर रुपया और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी इस नकारात्मक माहौल को और हवा दी है.
अब निवेशकों की निगाहें आने वाले हफ्तों पर टिकी हैं, जहां जियो प्लेटफॉर्म्स की बहुप्रतीक्षित शेयर बाजार में एंट्री, कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल के दामों में नरमी आती है और पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है, तभी भारतीय शेयर बाजार को इस भारी दबाव से राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है.










