भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने देश के घरेलू और युवा क्रिकेट ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम उठाया है. बोर्ड ने पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज परविंदर अवाना को जूनियर चयन समिति का नया मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किया है. इस जिम्मेदारी के मिलने के बाद खेल जगत में उनके संघर्ष भरे जीवन और शानदार सफर की चर्चा जोरों पर है.
परविंदर अवाना के लिए यह मुकाम हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. उत्तर प्रदेश के नोएडा से ताल्लुक रखने वाले अवाना ने बेहद कम उम्र में ही जीवन के कड़े संघर्षों का सामना किया था. जब वह महज चौदह वर्ष के थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था. ऐसे मुश्किल समय में उनकी मां ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और नोएडा अथॉरिटी में माली के रूप में कड़ी मेहनत करके अपने बच्चों की परवरिश की.
मां के त्याग और अपने बुलंद हौसलों के दम पर परविंदर ने क्रिकेट के मैदान पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई विकेट झटके और इंडिया ए के अलावा आईपीएल में भी अपनी गेंदबाजी का जलवा बिखेरा.
क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद परविंदर अवाना ने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और युवा खिलाड़ियों को तराशने का काम शुरू किया. उन्होंने दिल्ली की विभिन्न आयु वर्ग की टीमों के साथ जुड़कर अपनी कोचिंग का बेहतरीन अनुभव हासिल किया. उनकी इसी काबिलियत और अनुभव को देखते हुए क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी ने उन्हें इस पद के लिए चुना है.
बीसीसीआई द्वारा जूनियर चयन समिति का चीफ सेलेक्टर बनाए जाने के बाद अब परविंदर अवाना के कंधों पर देश के भविष्य के क्रिकेटर्स को तलाशने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है. उनकी यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को मात देकर भी सफलता के शिखर पर पहुंचा जा सकता है.










