जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है, जहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। इस नए राजनीतिक कदम के तहत घाटी से ताल्लुक रखने वाले चार अनुभवी और नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। शपथ ग्रहण करने वाले इन नेताओं में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी के नाम शामिल हैं। इस विस्तार के साथ ही अब सरकार के कामकाज को और अधिक गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंत्रिमंडल विस्तार की इस प्रक्रिया से पहले मौजूदा मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अपने औपचारिक इस्तीफे सौंप दिए थे, जिसके बाद यह साफ हो गया था कि विभागों में बड़ा फेरबदल किया जाएगा। शपथ लेने वाले नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर ने उर्दू भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। वहीं दूसरी ओर, त्रेहगाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक मीर सैफुल्ला ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की। इन चेहरों को शामिल किए जाने से पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत होने की बात कही जा रही है।
इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ खास बदलाव भी देखने को मिले हैं, जिसमें दो नए चेहरों को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हब्बाकदल से विधायक और महिला नेत्री शमीम फिरदौस ने अंग्रेजी भाषा में शपथ ली और वे मंत्रिपरिषद में सकीना इत्तू के बाद दूसरी महिला मंत्री बन गई हैं। उनके अलावा पहलगाम से विधायक अल्ताफ अहमद वानी, जिन्हें कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, ने भी पारंपरिक अंदाज में पहली बार मंत्री पद की शपथ ली है।
हालांकि मंत्रिमंडल में नए चेहरों के आने से खुशी का माहौल है, लेकिन टिकट या मंत्री पद न मिलने पर कुछ नेताओं की नाराजगी भी सामने आई है। विधायक मुबारक गुल ने खुलकर अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि वे कई बार शपथ ग्रहण समारोह देख चुके हैं लेकिन इस बार भी उन्हें जगह नहीं मिली। दूसरी तरफ, नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने फिलहाल सरकार से दूरी बनाए रखी है। कांग्रेस का रुख स्पष्ट है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक वे इस मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे।










