उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दलों ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी जमीन मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने रुहेलखंड क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए एक अचूक रणनीति तैयार की है। पार्टी का मुख्य फोकस बरेली और बदायूं जैसे महत्वपूर्ण जिलों में अपने राजनीतिक आधार को विस्तार देना है, जहां पिछले कुछ समय से समीकरणों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
अपनी इस रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के असंतुष्ट नेताओं और बागियों को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के इन बागी नेताओं को पार्टी में शामिल करके समाजवादी पार्टी रुहेलखंड क्षेत्र में एक बड़ा संदेश देना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन स्थानीय नेताओं के जुड़ने से उन इलाकों में समाजवादी पार्टी को सीधा फायदा मिलेगा जहां पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था।
बरेली और बदायूं क्षेत्र को हमेशा से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक गढ़ माना जाता रहा है। यहां की राजनीतिक जमीन पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। समाजवादी पार्टी की यह सेंधमारी की नीति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी इस बार चुनाव में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है और वह सत्ताधारी दल के दिग्गजों को उन्हीं की रणनीति से मात देने का प्रयास कर रही है।
खास बात यह है कि बागियों को पार्टी में शामिल करने से न केवल संगठन को संजीवनी मिल रही है, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी काफी ऊंचा हुआ है। स्थानीय स्तर पर इन नेताओं का अपना एक जनाधार है, जिसका सीधा लाभ समाजवादी पार्टी को चुनावी मैदान में मिल सकता है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस तरह के पाला बदलने की घटनाएं और अधिक तेजी से देखने को मिल सकती हैं, जिससे चुनावी मुकाबला बेहद रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।










