दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जिसके बाद राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने भारतीय सेना से एक बड़ी मांग करते हुए कहा है कि सेना के बैंड में मोहम्मद इकबाल द्वारा रचित लोकप्रिय गीत ‘सारे जहां से अच्छा’ को बजाना अब बंद कर दिया जाना चाहिए।
कुलपति योगेश सिंह ने यह टिप्पणी राजधानी दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि हालांकि इस प्रसिद्ध तराने की रचना मोहम्मद इकबाल ने की थी, लेकिन बाद के जीवन में उनके विचार पूरी तरह बदल गए थे और उन्होंने देश के विभाजन का खुलकर समर्थन किया था।
अपने संबोधन के दौरान डीयू के वीसी ने समाज के एक वर्ग के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इकबाल की इस रचना को तो गर्व के साथ गाते हैं, लेकिन जब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की बात आती है तो वे उससे किनारा कर लेते हैं या फिर गाने से साफ इनकार कर देते हैं।
हालांकि, इस कार्यक्रम में मौजूद केरल और बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कुलपति के इस विचार से असहमति जताई। पूर्व राज्यपाल का मानना था कि भले ही समय के साथ इकबाल के राजनीतिक विचार बदल गए हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्होंने भारत भूमि के प्रति अपने गहरे प्रेम को इन शब्दों के जरिए बयां किया था।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ को हमारी सभ्यतागत पहचान और राष्ट्रीय एकता का एक मजबूत प्रतीक बताया। बहरहाल, डीयू कुलपति की ओर से सेना के बैंड को लेकर दिए गए इस नए बयान के बाद अब देश भर में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।










