उत्तर प्रदेश के निर्वाचन विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य के बलिया जिले में हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में एक बेहद अजीब और आपत्तिजनक नाम दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था। इस वोटर लिस्ट में एक ऐसा नाम प्रिटेंड था जिससे राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब मतदाता सूची में दर्ज नाम को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह समेत कई अन्य राजनीतिक हस्तियों ने कड़ा एराज जताया। नेताओं का आरोप था कि इस प्रकार के नाम का सूची में होना और प्रशासनिक तंत्र का इस पर ध्यान न देना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।
विवाद जब तूल पकड़ने लगा तब मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक तीखी और व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया सामने आई। इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा और लहजे को लेकर आम जनता और राजनीतिक दलों में और अधिक गुस्सा भड़क उठा। आलोचकों का कहना था कि एक संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार विभाग द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना पूरी तरह से अनुचित और अमर्यादित है।
बढ़ते हुए राजनीतिक दबाव और जनता के भारी आक्रोश को भांपते हुए आखिरकार मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की तरफ से त्वरित कदम उठाया गया। विवादित पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से खेد जताते हुए माफी मांग ली गई। विभाग की ओर से यह स्वीकार किया गया कि सोशल मीडिया पर किया गया पिछला संवाद संस्था की गरिमा और स्थापित मापदंडों के अनुकूल नहीं था।
इस पूरी घटना के बाद निर्वाचन आयोग की तरफ से यह कड़ा आश्वासन दिया गया है कि भविष्य में किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया हैंडल पर पूरी सावधानी बरती जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आगे से जनता और राजनीतिक दलों के साथ होने वाला संवाद पूरी तरह से औपचारिक, शालीन और मर्यादित सीमाओं के भीतर ही रखा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद से बचा जा सके।










