Chandauli News : काशी वन्य जीव प्रभाग, चंदौली के जयमोहनी रेंज में शुक्रवार को वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। विभाग ने चोरमरवा और उत्तरी मझगांई वीट के जंगलों में सिर्फ 6 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि से कब्जा हटाया और इस दौरान 12 गरीब आदिवासी व वनवासी परिवारों की झोपड़ियाँ ढहा दीं।
आरोप यह है कि ठीक इसी क्षेत्र में स्थित बड़े मठों द्वारा की गई भारी भरकम वन भूमि पर कथित कब्जों को untouched छोड़ दिया गया, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
‘दिखावटी अभियान’ होने के आरोप
चंदौली के जंगलों में लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण वन संरक्षण के लिए गंभीर खतरा है। सरकार और वन विभाग का आधिकारिक उद्देश्य वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त कराना है। लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार जयमोहनी रेंज की यह कार्रवाई केवल दिखावे की प्रतीत होती है, क्योंकि विभाग ने कमजोर और गरीब समुदायों पर ही बुलडोज़र चलाया, जबकि प्रभावशाली कब्जाधारियों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया।
वन विभाग द्वारा 12 झोपड़ियों को गिराना और 6 हेक्टेयर जमीन को मुक्त कराना उस बड़े पैमाने के अतिक्रमण के सामने बेहद छोटी कार्रवाई बताई जा रही है, जिसका उल्लेख आदिवासी और वनवासी लगातार करते आ रहे हैं।
बड़े मठों के अतिक्रमण पर ‘मौन’
उत्तरी मझगांई वीट में मठों के नाम पर कथित अवैध कब्जा किया गया है। इसके बावजूद वन विभाग ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। स्थानीय समुदाय का कहना है कि-
“जब कानून गरीब की झोपड़ी और बड़े मठ के अवैध कब्जे दोनों पर समान रूप से लागू होता है, तो फिर भेदभावपूर्ण कार्रवाई क्यों?”
वन विभाग का यह रवैया विभाग की नीति और निष्पक्षता पर ही नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय निवासियों में गहरा रोष
वन विभाग की इस selective कार्रवाई ने स्थानीय वनवासियों और आदिवासी परिवारों में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि विभाग सिर्फ उन्हीं पर सख्ती दिखा रहा है जो विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं।
वन संरक्षण का उद्देश्य तभी सफल माना जाएगा जब विभाग बिना किसी भेदभाव के सभी तरह के अतिक्रमणों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग वास्तव में गंभीर है, तो उसे मठों सहित सभी बड़े अतिक्रमणकारियों पर भी कड़ा कदम उठाना चाहिए, ताकि यह संदेश स्पष्ट हो कि वन भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
Author: Shivam Verma
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