Lucknow News: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव टाल रही है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गांवों की वास्तविक स्थिति का सामना न करना पड़े।
लखनऊ के 8 मॉल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सुनील सिंह ने कहा कि पंचायत चुनावों में हो रही देरी केवल प्रशासनिक कारणों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव टालकर समय हासिल करना चाहती है और जनभावनाओं को दबाने का प्रयास कर रही है।
मुंबई मॉडल का उदाहरण देकर लगाए आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान सुनील सिंह ने मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तीन साल से अधिक समय तक चुनाव नहीं कराए गए और हर साल 85,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट अधिकारियों के माध्यम से खर्च किया गया। इस दौरान जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को पूरी तरह से प्रक्रिया से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी धनराशि बिना जवाबदेही के खर्च होती है, तो भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका स्वाभाविक है और जनता को इसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब इसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू करने की कोशिश की जा रही है, जहां पंचायत चुनावों को टालकर प्रशासनिक तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और हजारों करोड़ रुपये के बजट पर सीधा नियंत्रण रखा जा रहा है।
लोकतंत्र की जड़ों पर हमला—सुनील सिंह
सुनील सिंह ने कहा कि गांव की चुनी हुई सरकार को खत्म कर अफसरशाही के भरोसे व्यवस्था चलाना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार, पंचायत व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि गांव की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इस व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार जनता के बीच जाकर जवाबदेही निभाएगी या फिर अफसरों के पीछे छिपेगी।
जमीनी स्तर पर कमजोर स्थिति का डर
सुनील सिंह का कहना है कि सरकार को जमीनी स्तर पर अपनी कमजोर होती स्थिति का अंदाजा हो चुका है, इसलिए वह पंचायत चुनावों को टालकर राजनीतिक माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई होती हैं और समय पर चुनाव न कराना सीधे तौर पर जनता के अधिकारों का हनन है।
विकास कार्य प्रभावित, प्रशासनिक तंत्र हावी
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में देरी के कारण गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अभाव में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह हावी हो गया है, जिससे आम लोगों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। सुनील सिंह के मुताबिक, सरकार परिसीमन, आरक्षण और अन्य प्रक्रियाओं जैसे प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर चुनाव टाल रही है, जबकि इन प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा किया जा सकता था।
बजट खर्च पर पारदर्शिता की कमी का आरोप
सुनील सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों में देरी का एक बड़ा कारण पंचायतों के लिए आवंटित बजट का मनमाने तरीके से उपयोग करना है। उन्होंने कहा कि बिना जनप्रतिनिधियों की निगरानी के यह धनराशि प्रशासनिक तंत्र के जरिए खर्च की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी हो रही है। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ रही हैं और सरकारी संसाधनों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि समय पर चुनाव होते, तो जनता के चुने हुए प्रतिनिधि बजट के उपयोग पर निगरानी रखते और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाते। वर्तमान स्थिति में जनता का पैसा उसकी प्राथमिकताओं के बजाय सरकार की राजनीतिक रणनीतियों के तहत खर्च किया जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
सुनील सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही पंचायत चुनावों की घोषणा नहीं करती है, तो लोकदल प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनाव का मुद्दा नहीं है, बल्कि गांव, गरीब और आम नागरिक के अधिकारों की लड़ाई है, जिसे हर हाल में लड़ा जाएगा।
Author: Shivam Verma
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