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Lucknow News: महिला मार्च में जाम से जूझता लखनऊ; वीआईपी रैली के बीच घंटों फंसी जनता, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज महिला मार्च के दौरान शहर ने अव्यवस्था का ऐसा दृश्य देखा, जिसने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक ओर लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा का विशाल मार्च निकाला गया, वहीं दूसरी ओर पूरा शहर भीषण ट्रैफिक जाम के चक्रव्यूह में फंस गया। स्थिति ऐसी हो गई कि ट्रैफिक प्रबंधन के सभी दावे जमीन पर नाकाफी साबित हुए और आम लोगों को घंटों तक सड़कों पर जूझना पड़ा।

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पीक आवर्स में रैली, थम गई शहर की रफ्तार

सबसे बड़ा सवाल रैली के समय को लेकर उठा। यह मार्च उस समय आयोजित किया गया जब शहर में दफ्तर जाने का पीक आवर होता है। हजारों की भीड़ और वीआईपी मूवमेंट के चलते लखनऊ की प्रमुख सड़कों पर यातायात पूरी तरह से चरमरा गया।

अशोक मार्ग, चारबाग स्टेशन से लेकर हुसैनगंज, बर्लिंगटन चौराहा और बापू भवन चौराहे तक हालात बेहद खराब रहे। बापू भवन चौराहे से हजरतगंज की ओर जाने वाला मार्ग बंद कर दिया गया, जिसके चलते लोगों को प्रतिभा सिनेमा होते हुए माल एवेन्यू चौराहे से डायवर्ट किया गया। इस मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफिक रेंगने की स्थिति में पहुंच गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, कई अपने बच्चों को गोद में लिए, तेज धूप में मार्च करती नजर आईं, जिससे सड़क पर दबाव और बढ़ गया।

शहर के कई इलाकों में जाम का असर

कालिदास मार्ग चौराहे से 1090 चौराहे तक लंबा जाम लगा रहा, जहां आधी सड़क पर बसें खड़ी थीं और जगह-जगह महिलाओं के समूह रुके हुए थे। इसी तरह सुल्तानपुर रोड पर अर्जुनगंज से सोमनाथ द्वार तक यातायात प्रभावित रहा। रायबरेली रोड, कानपुर रोड, हरदोई रोड, सीतापुर रोड, कुर्सी रोड और फैजाबाद रोड पर भी हालात कुछ अलग नहीं थे।

चिलचिलाती धूप और उमस के बीच लोग कई किलोमीटर तक अपने वाहनों में फंसे रहे, लेकिन ट्रैफिक नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आई।

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल, चालान को लेकर नाराजगी

इस पूरे घटनाक्रम में लखनऊ पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में रही। जाम खुलवाने के बजाय कई जगह पुलिसकर्मी निष्क्रिय दिखाई दिए। स्थिति तब और विचित्र हो गई जब एक तरफ कुछ पुलिसकर्मी वाहन चालकों को आगे बढ़ने का संकेत दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर अन्य पुलिसकर्मी उन्हीं वाहनों की तस्वीरें लेकर चालान काटते नजर आए।

इस समन्वय की कमी ने लोगों में नाराजगी बढ़ा दी। कई लोगों का आरोप रहा कि प्रशासन का पूरा ध्यान वीआईपी मूवमेंट पर केंद्रित था, जबकि आम नागरिकों की परेशानियों को नजरअंदाज किया गया।

एम्बुलेंस भी जाम में फंसी, नहीं मिला रास्ता

सबसे चिंताजनक तस्वीर तब सामने आई जब कई एम्बुलेंस भी इस भारी जाम में फंस गईं। सायरन बजने के बावजूद उन्हें रास्ता नहीं मिल सका। जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर रही, लेकिन मौके पर मौजूद प्रशासन स्थिति संभालने में असहाय दिखा।

लखनऊ में महिला मार्च के दौरान उत्पन्न यह हालात शहर के ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े करते हैं, जहां रैली के शोर में आम जनता की बुनियादी सुविधाएं पीछे छूटती नजर आईं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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