Delhi News: भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को अब ‘जन गण मन’ के समान ही सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब राष्ट्रगीत का अपमान करना या इसके गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करना एक गंभीर कानूनी अपराध की श्रेणी में आ गया है।
इस नए कानून के लागू होने से देश में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और अधिक मजबूत होगा। अब तक वंदे मातरम के लिए कोई विशिष्ट कानूनी सुरक्षा प्रावधान नहीं थे, लेकिन इस संशोधन के माध्यम से इसे ‘जन गण मन’ के समकक्ष दर्जा दे दिया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाने और उसे कानूनी संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या उसमें व्यवधान डालने का दुस्साहस न कर सके।
कानून के उल्लंघन पर दंड का भी कड़ा प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर रुकावट पैदा करता है, तो उसे अधिकतम तीन साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। वहीं, यदि कोई व्यक्ति इस अपराध को दोबारा दोहराता है, तो उसके लिए कम से कम एक साल की कैद की सजा सुनिश्चित की गई है। यह प्रावधान देश के नागरिकों में राष्ट्रीय गीत के प्रति गरिमा और आदर बनाए रखने के लिए अनिवार्य किए गए हैं।
ऐतिहासिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान रहा है। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी 1950 में स्पष्ट किया था कि इस गीत को राष्ट्रगान के बराबर ही सम्मान दिया जाएगा। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, अब केंद्र सरकार ने इसे पूरी कानूनी सुरक्षा प्रदान कर दी है। आने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम का गायन इस नई शुरुआत का गवाह बनेगा।
इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आधिकारिक समारोहों के दौरान यदि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत एक साथ बजाए जाते हैं, तो राष्ट्रगीत के सभी छह श्लोकों को पहले गाया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के आगमन, झंडा फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए भी प्रोटोकॉल तय कर दिए गए हैं। यह पहल न केवल राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान को रेखांकित करती है, बल्कि देश की अखंडता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती देती है।
Author: Shivam Verma
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