Lucknow News: लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाते हुए आईआरसीटीसी (IRCTC) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को सजा सुनाई है। कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) जमा करने के दोषी पाए गए पूर्व चीफ रीजनल मैनेजर कृष्ण मोहन त्रिपाठी को तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, उन पर 14.75 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। जांच के अनुसार, कृष्ण मोहन त्रिपाठी पर वर्ष 2009 में 70,000 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था, जिसके बाद सीबीआई ने एक ट्रैप ऑपरेशन के जरिए उन्हें गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद शुरू हुई विस्तृत जांच में यह खुलासा हुआ कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी। सीबीआई ने 24 फरवरी 2010 को इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज किया था।
अदालत में चले इस लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए। ट्रायल में यह साबित हुआ कि त्रिपाठी के पास उनकी कानूनी आय से 102.53 प्रतिशत अधिक संपत्ति थी, जिसकी कुल राशि करीब 1.44 करोड़ रुपये आंकी गई थी। तमाम साक्ष्यों और तथ्यों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद, सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
सीबीआई की ओर से सरकारी भ्रष्टाचार के मामलों में यह एक और बड़ी कार्रवाई है। एजेंसी के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में लगातार पैनी नजर रखी जा रही है ताकि सरकारी तंत्र में शुचिता बनी रहे। इसी तरह के एक अन्य मामले में, पिछले साल अहमदाबाद की अदालत ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के एक पूर्व इंस्पेक्टर को भी बड़ी सजा सुनाई थी, जिस पर उसकी आय से 314 प्रतिशत अधिक संपत्ति रखने का आरोप था।
वर्तमान में भी सीबीआई देश भर के विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के नए मामले दर्ज कर रही है। चाहे पांडिचेरी यूनिवर्सिटी का मामला हो या अन्य कोई सरकारी महकमा, जांच एजेंसी भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी प्रक्रिया अपना रही है, जो सरकारी नौकरी में बैठे लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है।
Author: Shivam Verma
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