Sant Kabir Nagar News: संतकबीरनगर जिले के नाथनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार को मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सहयोग से जुड़ा एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर के समाजसेवी देवेश मणि त्रिपाठी ने टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए 200 मरीजों को पोषण पोटली वितरित की। इस पहल से मरीजों के बीच नई उम्मीद और आत्मविश्वास देखने को मिला।
स्वास्थ्य अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की अध्यक्षता चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्वेतांक सिंह ने की, जबकि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अमित सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। धनघटा तहसील क्षेत्र के टीबी मरीजों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए भी प्रेरित किया गया।
निक्षय मित्र के रूप में सामने आए देवेश मणि त्रिपाठी
समाजसेवी देवेश मणि त्रिपाठी ने निक्षय मित्र के रूप में आगे बढ़कर यह संदेश दिया कि सामाजिक भागीदारी से स्वास्थ्य अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने मरीजों को मक्का, चना, छुहारा, प्रोटीन पाउडर सहित अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री से युक्त पोषण पोटली वितरित की। इसके साथ ही मरीजों को टॉनिक भी दिया गया, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके।
इस सहायता को पाकर कई मरीजों और उनके परिजनों ने खुशी जताई और समाजसेवी के प्रति आभार व्यक्त किया। मरीजों ने कहा कि इस तरह का सहयोग उनके लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।
अधिकारियों ने की पहल की सराहना
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन के लिए लगातार कार्य कर रहा है, लेकिन समाज की भागीदारी इस अभियान को और मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि देवेश मणि त्रिपाठी जैसे समाजसेवी टीबी के खिलाफ चल रही लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन पौष्टिक आहार और मानसिक सहयोग मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्वेतांक सिंह ने मरीजों को संबोधित करते हुए कहा कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही इलाज, नियमित दवा और बेहतर पोषण के जरिए इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने मरीजों से सकारात्मक सोच बनाए रखने और उपचार में लापरवाही न बरतने की अपील की।
समाज में संवेदनशीलता और सहयोग का संदेश
देवेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि मरीजों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करना भी है। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। उनका मानना है कि जब तक समाज का हर सक्षम व्यक्ति आगे नहीं आएगा, तब तक किसी भी सामाजिक अभियान को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती।
उनकी इस पहल ने न केवल मरीजों को राहत पहुंचाई, बल्कि समाज में सहयोग और संवेदनशीलता का सकारात्मक संदेश भी दिया।
टीबी उन्मूलन अभियान को मिली नई ऊर्जा
नाथनगर में आयोजित यह कार्यक्रम टीबी उन्मूलन अभियान के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। 200 मरीजों को पोषण पोटली मिलने से जहां उनके स्वास्थ्य को मजबूती मिलेगी, वहीं मानसिक रूप से भी उन्हें संबल प्राप्त होगा। स्वास्थ्य विभाग और समाजसेवियों की साझेदारी भविष्य में टीबी के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Author: Shivam Verma
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