UP News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मंगलवार को लखनऊ और रायबरेली दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। राहुल गांधी के स्वागत कार्यक्रम के बीच लखनऊ एयरपोर्ट पर हुआ एक घटनाक्रम पार्टी संगठन के भीतर चल रही खींचतान और गुटबाजी को उजागर कर गया।
बताया गया कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अजय कुमार लल्लू को राहुल गांधी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। उन्हें सुरक्षा पास की सूची में शामिल नहीं किया गया था, जिसके बाद एयरपोर्ट परिसर के बाहर काफी देर तक राजनीतिक हलचल और तीखी बहस का माहौल बना रहा।
एयरपोर्ट पर राहुल गांधी और अजय कुमार लल्लू के बीच हुई बातचीत
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को राहुल गांधी के लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता वहां मौजूद थे। हालांकि अजय कुमार लल्लू को एयरपोर्ट के भीतर जाने के लिए पास जारी नहीं किया गया था।
इसके बावजूद लल्लू एयरपोर्ट के बाहर मौजूद रहे। जब राहुल गांधी एयरपोर्ट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठे, तब अजय कुमार लल्लू उनके वाहन तक पहुंचे। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने अपनी कार का शीशा नीचे किया और दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई। इस दौरान वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हलचल तेज हो गई।
यूपी में कमजोर हुई पकड़, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व में कायम है प्रभाव
अजय कुमार लल्लू कभी उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रमुख चेहरा माने जाते थे। प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता सदन के रूप में उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था और सड़क से लेकर सदन तक पार्टी की आवाज बुलंद की थी।
हालांकि मौजूदा समय में प्रदेश संगठन में उनकी स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं मानी जा रही है। पार्टी के वर्तमान नेतृत्व के साथ उनके मतभेदों की चर्चा लंबे समय से होती रही है। इसके बावजूद कांग्रेस आलाकमान में उनकी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है।
यही कारण है कि फरवरी 2025 में कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए ओडिशा का एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया था। इससे यह संकेत भी मिला था कि केंद्रीय नेतृत्व अब भी उन पर भरोसा जताता है।
एयरपोर्ट पास विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं
लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता के दौरे के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्तर के नेता को एयरपोर्ट पास न मिलना सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना यूपी कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी और पुराने तथा नए नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी को दर्शाती है। पार्टी के अंदर कुछ गुटों द्वारा पुराने नेताओं को संगठन की मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिशों की भी चर्चा हो रही है।
संगठन को मजबूत करने की कोशिशों के बीच बढ़ी चुनौती
राहुल गांधी लगातार दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक कांग्रेस संगठन को मजबूत और एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर नेताओं के बीच दिखाई दे रही खींचतान पार्टी के मिशन यूपी के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है।
राज्य में संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना कांग्रेस नेतृत्व के लिए फिलहाल सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
Author: Shivam Verma
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