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Raebareli News: रायबरेली में 1857 के महानायकों को सम्मान, शंकरपुर में राहुल गांधी ने किया प्रतिमाओं का अनावरण

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Raebareli News: उत्तर प्रदेश के बैसवारा क्षेत्र की ऐतिहासिक धरती पर एक बार फिर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा जीवंत हो उठी। रायबरेली के शंकरपुर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महान स्वतंत्रता सेनानी राणा बेनी माधव सिंह और उनके विश्वस्त सेनापति वीरा पासी की प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर ने स्वतंत्रता संग्राम के उन अमर नायकों की यादों को फिर से ताजा कर दिया, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मिलकर संघर्ष किया था।

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गौरतलब है कि 20 फरवरी 2025 को राहुल गांधी ने शंकरपुर में राणा बेनी माधव सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया था। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए ब्लॉक प्रमुख राही धर्मेन्द्र कुमार यादव के विशेष प्रयासों से अब महानायक वीरा पासी की प्रतिमा का भी अनावरण कराया गया। इतिहास में राणा बेनी माधव सिंह और वीरा पासी की जोड़ी को राष्ट्रभक्ति, साहस और सामाजिक सद्भाव की मिसाल माना जाता है।

अवध की धरती के वीर योद्धा थे राणा बेनी माधव सिंह

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अवध क्षेत्र में क्रांति की अलख जगाने वाले शंकरपुर के शासक राणा बेनी माधव सिंह को एक कुशल रणनीतिकार और निर्भीक योद्धा के रूप में जाना जाता है। उनकी वीरता से अंग्रेजी शासन भी भयभीत रहता था।

बेगम हजरत महल के आह्वान पर उन्होंने लखनऊ की घेराबंदी में सक्रिय भूमिका निभाई थी। राणा बेनी माधव सिंह ने अपनी छापामार यानी गोरिल्ला युद्ध नीति के जरिए ब्रिटिश सेना को कई बार करारी शिकस्त दी। कर्नल रॉबर्ट्स जैसी अंग्रेजी टुकड़ियों को भी उनकी रणनीति के सामने भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

अंग्रेजों ने उन्हें आत्मसमर्पण करने और जागीर वापस लौटाने का लालच भी दिया था, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा था- “मैं अपनी जमीन छोड़ सकता हूँ, लेकिन अपने देश और राजा के प्रति अपनी वफादारी कभी नहीं बेच सकता।”

वीरा पासी ने निभाई सबसे भरोसेमंद साथी की भूमिका

इतिहास इस बात का साक्षी है कि राणा बेनी माधव सिंह की लड़ाई में उनके सबसे विश्वस्त सेनापति वीरा पासी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और कई मोर्चों पर अंग्रेजी सेना को चुनौती दी।

जब अंग्रेजों ने शंकरपुर किले को घेरकर तहस-नहस कर दिया था, तब वीरा पासी ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए राणा बेनी माधव सिंह को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद दोनों ने नेपाल की तराई के जंगलों में रहकर अंग्रेजों और स्थानीय ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। नवंबर 1859 में दोनों वीरगति को प्राप्त हुए।

लोकगीतों में आज भी जीवित है वीरता की गाथा

राणा बेनी माधव सिंह और वीरा पासी केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक एकता और जनसामान्य के नेतृत्व के प्रतीक भी माने जाते हैं। रायबरेली और अवध क्षेत्र के लोकगीतों में आज भी उनकी वीरता, दोस्ती और बलिदान की गाथाएं सुनाई देती हैं।

शंकरपुर में दोनों महानायकों की प्रतिमाओं की स्थापना को इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, त्याग और आपसी भाईचारे की प्रेरणा देने का कार्य करेगी।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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