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MP News: नवाबी संपत्ति विवाद- ईओडब्ल्यू की सख्ती, अभिनेता सैफ अली खान से मांगे गए 1370 एकड़ जमीन के मूल दस्तावेज

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MP News: भोपाल रियासत से जुड़ी नवाबी संपत्ति का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इस बहुचर्चित भूमि विवाद में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार से स्पष्टीकरण मांगा है। जांच एजेंसी ने करीब 1,370 एकड़ भूमि के मालिकाना हक से जुड़े मूल दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिससे नवाब परिवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

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यह पूरा विवाद भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की पत्नी आफताब जहां बेगम द्वारा बेची गई संपत्तियों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। आरोप है कि संपत्तियों की बिक्री के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और ‘शत्रु संपत्ति’ से जुड़े कानूनों का पालन नहीं हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय और ईओडब्ल्यू महानिदेशक को मिली शिकायतों के बाद इस मामले में जांच प्रक्रिया ने गति पकड़ी है, जिसके चलते सैफ अली खान समेत पटौदी परिवार के अन्य सदस्य जांच के दायरे में आ गए हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि पूर्व में उच्च न्यायालय के समक्ष सैफ अली खान ने इस विवादित 1,370 एकड़ भूमि को नवाब की निजी संपत्ति करार दिया था। अब जांच समिति यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन जमीनों की वर्तमान स्थिति क्या है और इनका मालिकाना हक किसके पास है। विशेष रूप से नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेटी के पाकिस्तान प्रवास के बाद उनकी संपत्ति को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर भी जांच की जा रही है।

ईओडब्ल्यू अब उन ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स की पड़ताल कर रहा है, जो 1949 के मर्जर एग्रीमेंट और बीपी मेनन द्वारा हस्ताक्षरित नक्शों से संबंधित हैं। एजेंसी ने पटौदी परिवार से वर्ष 1949 से पहले की संपत्ति सूची और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मूल प्रतियां मांगी हैं। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न गांवों में नवाब परिवार के नाम दर्ज अतिरिक्त भूमि सौदों की भी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जमीन की खरीद-बिक्री में कोई धांधली तो नहीं हुई है।

यह मामला कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर जैसे इलाकों की कीमती जमीनों से जुड़ा है, जिनकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है। फिलहाल, जांच का फोकस 1959 के राजस्व अभिलेखों और उन समझौतों पर है, जिनके आधार पर जमीन का हस्तांतरण किया गया था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पटौदी परिवार की ओर से ईओडब्ल्यू को इन दस्तावेजों के जवाब में क्या जानकारी दी जाती है, जो इस कानूनी लड़ाई का भविष्य तय करेगी।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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