Delhi News: देश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का गंभीर आरोप लगाया है। यह पूरा विवाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए द्वारा दाखिल की गई एक चार्जशीट को लेकर शुरू हुआ है, जिसमें म्यांमार मामले से जुड़े एक अमेरिकी नागरिक पर से यूएपीए जैसी गंभीर धाराएं हटा ली गई हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या एनआईए की यह कार्रवाई किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का परिणाम थी, या फिर अमेरिकी अधिकारियों के भारी दबाव के चलते सरकार ने यह कदम उठाया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस फैसले से देश की संप्रभुता पर सवाल खड़े होते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो एनआईए ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इन सभी पर म्यांमार के सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप है। हैरानी की बात यह है कि शुरुआती जांच में यूएपीए के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद, फाइनल चार्जशीट से इन धाराओं को हटा दिया गया है।
दूसरी ओर, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और यह जारी है। एजेंसी का कहना है कि यदि जांच के दौरान आतंकवाद से जुड़े यूएपीए के तहत कोई ठोस सबूत या अपराध साबित होता है, तो भविष्य में एक पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया जा सकता है। फिलहाल अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।
इस बीच, अमेरिकी नागरिक के परिवार ने भी तिहाड़ जेल में बंद मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई के लिए राजनयिक स्तर पर दखल देने की मांग उठाई है। परिवार का दावा है कि मैथ्यू बेकसूर हैं और उन्हें जेल में बुनियादी मानवाधिकार भी नहीं मिल रहे हैं। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक तूल पकड़ सकता है।











