World News: अमेरिका में अवैध प्रवासियों को उच्च शिक्षा के दौरान कम ट्यूशन फीस देने की नीतियों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी न्याय विभाग ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ एक नया मुकदमा दायर किया है। सरकार का यह कदम देश के उन उच्च शिक्षण संस्थानों की नीतियों को चुनौती देने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जो बिना कानूनी दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को स्थानीय छात्रों की तर्ज पर कम फीस का लाभ देते हैं।
न्याय विभाग द्वारा दायर किए गए इस मामले के केंद्र में यूनिवर्सिटी की वह नीति है जिसके तहत वैध कानूनी स्टेटस न रखने वाले कुछ प्रवासी कम इन-स्टेट ट्यूशन फीस के दायरे में आ जाते हैं। इसके विपरीत, डेलावेयर राज्य से बाहर के कई अमेरिकी नागरिकों को सामान्य रूप से काफी ज्यादा नॉन-रेजिडेंट फीस चुकानी पड़ती है। फेडरल अधिकारियों का तर्क है कि यह व्यवस्था अमेरिकी कानूनों के खिलाफ है और इसके जरिए उन लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जो देश में गैरकानूनी रूप से रह रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों का कहना है कि कांग्रेस ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि राज्य ऐसे प्रवासियों को रियायती ट्यूशन फीस का फायदा नहीं दे सकते जो आम अमेरिकी नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं है। न्याय विभाग ने संघीय अदालत से मांग की है कि यूनिवर्सिटी की इस विवादित नीति को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और भविष्य में ऐसी किसी भी नीति के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया जाए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस नए मुकदमे के साथ ही अवैध प्रवासियों को रियायती फीस देने वाली नीतियों के खिलाफ दायर किए गए मामलों की कुल संख्या अब 26 हो गई है। देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानूनी विवाद चल रहे हैं, जिनमें से कई मामलों में अदालतों के फैसले फेडरल सरकार के पक्ष में आए हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के इस सख्त रुख से अमेरिका के अन्य विश्वविद्यालयों की नीतियों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।










