Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर को मिलने वाले दान में कथित वित्तीय हेराफेरी और अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ तौर पर कहा है कि इस संवेदनशील मामले की जांच पूरी तरह से पारदर्शी और पेशेवर होनी चाहिए। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वे मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) के पुनर्गठन के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश लें।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में राज्य पुलिस मामले की जांच कर रही है और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर असंतोष जाहिर करते हुए निर्देश दिया कि जांच का नेतृत्व एक अनुभवी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हाथों में सौंपा जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि इस तरह के गंभीर मामलों में अनुभव और कुशलता बेहद जरूरी है ताकि सच सामने आ सके।
दान के रिकॉर्ड और पारदर्शिता पर चर्चा करते हुए कोर्ट ने कहा कि हालांकि ट्रस्ट को हर जानकारी सार्वजनिक करने की अनिवार्यता नहीं है, लेकिन दानदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए रसीदों और वित्तीय लेनदेन का व्यवस्थित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले को किसी भी तरह से राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह केवल कानून के दायरे में होने वाली एक आपराधिक जांच है।
अदालत ने साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त हिदायत दी है। याचिकाकर्ताओं की चिंताओं पर सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित रखे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह खुद इस मामले की निगरानी कर रही है, इसलिए बेवजह की दखलंदाजी से बचना चाहिए और जांच को अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने देना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई अब 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। उस दिन उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी के पुनर्गठन और जांच की दिशा को लेकर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती साबित करती है कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर न्यायपालिका कोई भी समझौता करने के मूड में नहीं है।
Author: Shivam Verma
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