Barabanki News: NH 27 लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर जगह-जगह सड़क किनारे सजी मानक विहीन दुकानों ने यातायात व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। पटरी पर कुकुरमुत्तों की तरह उगी इन दुकानों में गुड्डा-गुड़िया सहित अन्य सामान का व्यापार खुलेआम फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धंधा आखिर किसकी अनुमति से संचालित हो रहा है, यह स्पष्ट नहीं है।
चौकी आवास विकास क्षेत्र के पास स्थिति गंभीर
मामला किसी दूरस्थ इलाके का नहीं, बल्कि चौकी आवास विकास के कुरौली दारापुर के पास हाईवे किनारे का है। यहां सड़क की पटरी पर अस्थायी दुकानें सजाई गई हैं, जिनके चलते यातायात प्रभावित हो रहा है। चार पहिया वाहन इन दुकानों से सामान खरीदने के लिए हाईवे पर ही खड़े हो जाते हैं।
इस कारण दोपहिया वाहन चालकों को बीच सड़क से होकर निकलना पड़ता है। ऐसे में यदि पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन आ जाए तो दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह स्थिति किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।
बताया जा रहा है कि इस समस्या को लेकर पूर्व में भी समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं। पिछले महीने भी इसे प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हाईवे प्रबंधन की प्राथमिकता टोल टैक्स तक सीमित दिखाई दे रही है, क्योंकि वह आय का प्रमुख स्रोत है। सड़क सुरक्षा और अतिक्रमण जैसे मुद्दे नजरअंदाज किए जा रहे हैं।
दुकानदारों की पहचान पर भी सवाल
इन दुकानों को संचालित करने वाले लोगों की पहचान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह लोग कहां के निवासी हैं और किस आधार पर यहां व्यापार कर रहे हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई इनसे पूछताछ करने की कोशिश करता है तो ये लोग आक्रामक हो जाते हैं। यहां तक कि पुरुष पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपशब्दों का प्रयोग कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जाती है और महिला को आगे कर दिया जाता है, जिससे स्थिति असहज हो जाती है।
हाईवे किनारे इस प्रकार की अव्यवस्थित और मानक विहीन दुकानों का संचालन न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। इसके बावजूद न तो संबंधित अधिकारी खुलकर बात करने को तैयार हैं और न ही अब तक किसी प्रभावी कार्रवाई के संकेत मिले हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक हाईवे पर यूं ही अव्यवस्था का आलम बना रहेगा और जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आएंगे।
Author: Shivam Verma
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