Rajasthan News: राजस्थान के दौसा जिले में शिक्षा और हुनर के तालमेल का एक शानदार उदाहरण देखने को मिला है। स्थानीय महात्मा गांधी विद्यालय में आयोजित 40 दिवसीय निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह बेहद उत्साहजनक रहा। इस विशेष आयोजन के दौरान जिले के 450 से अधिक बालक-बालिकाओं ने भाग लिया और विभिन्न कलात्मक एवं तकनीकी विधाओं में निपुणता हासिल की। यह पहल बच्चों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।
समारोह के मुख्य अतिथि और उपखण्ड अधिकारी संजू मीना ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर एक अद्वितीय सृजनात्मक क्षमता होती है। सही दिशा और प्रशिक्षण मिलने पर यह क्षमता व्यक्तित्व विकास का आधार बनती है। उन्होंने उपस्थित छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि शिविर में सीखे गए ये कौशल न केवल उनके करियर में काम आएंगे, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे।
अनुराग सेवा संस्थान और राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस शिविर में बच्चों को सिलाई, ड्राइंग, मेहंदी और क्रोशिया जैसे अनेक हुनर सिखाए गए। इसके अलावा, शिविर के दौरान अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण जैसे आधुनिक विषयों पर आधारित प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण रही। बच्चों द्वारा कबाड़ से जुगाड़ और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का निर्माण करना उनकी पर्यावरण के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।
इस अवसर पर संस्थान के संयोजक सियाराम शर्मा ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था के 31 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ऐसे सेवा कार्य निरंतर जारी रहेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि समाज के हर वर्ग तक शिक्षा और प्रशिक्षण पहुंचाने के लिए भविष्य में भी निःशुल्क शिविरों का आयोजन किया जाएगा। शिविर के सफल संचालन में जिला समन्वयक डॉ. संजीव रावत और सी ओ गाइड निरमा मीणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के सम्मान समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। बच्चों ने लोकगीत, नृत्य और शास्त्रीय संगीत के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिससे उपस्थित अभिभावक और शिक्षक बेहद प्रभावित हुए। इसके साथ ही, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को भी इस मंच से सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम का उद्देश्य और अधिक प्रेरणादायी बन गया।











