आज के दौर में युवा अपने करियर को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं और एक बेहतर भविष्य की तलाश में कठिन परिश्रम करते हैं. हालांकि, जब वे किसी भी क्षेत्र में भारी प्रतियोगिता देखते हैं, तो अक्सर उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है और वे पीछे हटने लगते हैं. प्रसिद्ध शिक्षाविद् और दृष्टि आईएएस के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने युवाओं के इसी डर को दूर करने के लिए सफलता का एक नया और अचूक मंत्र साझा किया है.
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का साफ तौर पर यह मानना है कि किसी भी फील्ड में सफलता पाने का शॉर्टकट नहीं होता है. इसके बजाय युवाओं को भीड़ का हिस्सा बनने से बचना चाहिए और पूरी तरह से अपनी कार्यकुशलता और स्किल्स को सुधारने पर जोर देना चाहिए. यदि कोई भी उम्मीदवार पूरी ईमानदारी और फोकस के साथ लगातार दो से तीन साल तक मेहनत कर ले, तो वह अपने चुने हुए क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञों में आसानी से गिना जा सकता है.
आगे की बात करते हुए उन्होंने समझाया कि देश में प्रतियोगिता को अक्सर कुल आवेदकों की संख्या से आंक लिया जाता है, जो कि पूरी तरह सही नहीं है. उदाहरण के तौर पर, यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में लाखों युवा फॉर्म भरते हैं, लेकिन उनमें से एक बड़ा हिस्सा न तो पूरी गंभीरता से पढ़ाई करता है और न ही अपनी तैयारी को लेकर अनुशासित रहता है. इसलिए असली मुकाबला बहुत छोटे दायरे में होता है.
यह नियम केवल सिविल सेवा परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस क्षेत्र पर लागू होता है जहां करियर बनाया जा सकता है. चाहे बात मनोरंजन जगत यानी एक्टिंग की हो, खेल की हो, बिजनेस की हो या फिर किसी अन्य कला की, सफलता तभी मिलती है जब व्यक्ति अपनी प्रतिभा को लगातार तराशता है. केवल किसी क्षेत्र में प्रवेश पा लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां टिके रहने के लिए असाधारण कौशल की आवश्यकता होती है.
अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि सफलता का मतलब सिर्फ प्रशासनिक पदों जैसे आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनना ही नहीं होता है. आप अपनी रुचि के अनुसार किसी भी सेक्टर में अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि आप दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी कमियों को पहचानें और एक सही दिशा में निरंतर प्रयास करते रहें.










