Delhi News: आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे पूर्व नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखता और यह पार्टी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों की कथित बगावत से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए भूषण ने यह टिप्पणी की।
राज्यसभा टिकटों को लेकर लगाए गंभीर आरोप
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने पैसे लेकर राज्यसभा के टिकट दिए थे। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जिन्हें बाद में ब्लैकमेल किया जा सकता था और भाजपा ने उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाया।
भूषण ने कहा कि आम तौर पर उन्हें नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी का कोई लंबा राजनीतिक भविष्य है। उनके अनुसार, यदि किसी पार्टी में इस तरह की प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी और राज्यसभा के टिकट ऐसे लोगों को दिए जाएंगे जिनकी कमजोरियां राजनीतिक दबाव का आधार बन सकती हैं, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ने उन राज्यसभा सांसदों की कमजोर नब्ज पकड़ ली, जिन पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जा सकते थे। भूषण के मुताबिक, यदि ऐसे लोगों को राज्यसभा भेजा जाएगा जिन्होंने किसी प्रकार की बेईमानी की हो और टिकट वितरण में धन का प्रभाव रहा हो, तो पार्टी के भीतर इस तरह की परिस्थितियां पैदा होना स्वाभाविक है।
केजरीवाल के साथ मतभेद और पार्टी से अलगाव का जिक्र
इंटरव्यू के दौरान प्रशांत भूषण ने अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के साथ अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने बताया कि समय के साथ पार्टी के भीतर पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र कमजोर पड़ता गया, जिसके चलते उनके मतभेद बढ़े।
भूषण ने आरोप लगाया कि पार्टी की मूल नीतियों और आदर्शों को धीरे-धीरे खत्म कर दिया गया। उनके अनुसार, कई नेताओं को झूठे आरोपों के आधार पर किनारे किया गया और संगठन के भीतर असहमति को बगावत के रूप में देखा जाने लगा।
उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के स्वयंसेवकों का एक मंच बनने पर इसे बगावत माना गया। भूषण के मुताबिक, एक नेता को बदनाम करने के लिए उसके नाम से संदेश प्रसारित कराया गया, जिसमें भाजपा में शामिल होने की बात कही गई थी। बाद में उस नेता को गद्दार बताकर निलंबित कर दिया गया।
जांच की मांग पर भी उठाए सवाल
प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जांच कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उनका दावा है कि बाद में कराई गई जांच में यह सामने आया कि संदेश पार्टी से जुड़े ही एक व्यक्ति द्वारा भेजा गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकपाल की व्यवस्था समाप्त कर दी गई और पारदर्शिता के तंत्र कमजोर कर दिए गए। भूषण के अनुसार, यही वे कारण थे जिनकी वजह से उनका आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से विवाद बढ़ा।
उम्मीदवारों के चयन को बताया विवाद की बड़ी वजह
भूषण ने कहा कि उनका मुख्य विवाद उम्मीदवारों की सूची को लेकर था। उन्होंने बताया कि कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को छोड़कर उन्होंने अधिकांश के लिए प्रचार नहीं किया था। उनके अनुसार, टिकट वितरण की प्रक्रिया में गड़बड़ियां दिखाई देने लगी थीं, जिससे उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद गहरे होते गए।
राघव चड्ढा की अगुआई में हुई कथित बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत भूषण ने दोहराया कि उन्हें नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी लंबे समय तक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में बनी रह पाएगी। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी धीरे-धीरे कमजोर होती जाएगी और अंततः उसका राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो सकता है।
Author: Shivam Verma
Description











