MP News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर के समीप शुक्रवार का दिन काफी हलचल भरा रहा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी हालिया निर्देशों के पालन में, मुस्लिम समुदाय ने परिसर से सटी निर्धारित जगह पर जुमे की नमाज अदा की। जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए खसरा नंबर 612 वाली जमीन को नमाज के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया था और वहां आवश्यक तैयारियां पूरी की थीं।
इस नमाज से पहले स्थानीय स्तर पर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई थी। स्थानीय रहवासियों ने इस स्थान पर नमाज का विरोध करते हुए इसे अपनी निजी जमीन बताया। ग्रामीणों का दावा है कि वे वर्षों से इस भूमि पर खेती करते आए हैं। हालांकि, स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर पहुंचे एसडीएम राजकुमार हलदर और पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को उनकी आपत्तियों पर उचित और निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
प्रशासन की ओर से नमाजियों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। चूंकि शुक्रवार को क्षेत्र में बारिश हो रही थी, इसलिए नमाज के लिए तिरपाल और अन्य व्यवस्थाएं जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गईं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी और नमाज स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला पिछले काफी समय से कानूनी दांव-पेच में फंसा हुआ है। इसी साल मई में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया था। इस फैसले में हाई कोर्ट ने एएसआई के उस पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत पूर्व में वहां नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि मस्जिद निर्माण के लिए मुस्लिम पक्ष सरकार से अलग जमीन की मांग कर सकता है।
वर्तमान में यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर से सटे दरगाह क्षेत्र में शुक्रवार की दोपहर 1 से 3 बजे के बीच इबादत करने की अनुमति दी है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में राज्य सरकार और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से नमाज के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन कर सकते हैं।
Author: Shivam Verma
Description










