World News: कश्मीर को लेकर दुनिया भर में ढोंग रचने वाले पाकिस्तान की असलियत अब पूरी तरह दुनिया के सामने आ चुकी है। एक ओर पाकिस्तानी हुकूमत भारत के जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देकर अशांति फैला रही है, तो वहीं दूसरी ओर अपने ही कब्जे वाले पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में वह बर्बरता की सभी हदें पार कर रही है।
PoK के मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे इलाकों में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहां की जनता महंगाई, बिजली की भारी कटौती और अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आई है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही वहां की आम अवाम के खिलाफ पाकिस्तानी फौज ने दमनकारी रुख अपनाते हुए गोलियां बरसाना शुरू कर दिया है, जिससे अब तक कई लोगों के मारे जाने की खबरें हैं।
स्थानीय सूत्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों का आंकड़ा अब 125 के पार पहुंच चुका है। पाकिस्तानी सेना की इस क्रूरता को छिपाने के लिए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और संचार सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है, ताकि उनकी दरिंदगी की तस्वीरें बाहरी दुनिया तक न पहुंच सकें। महिलाओं और बुजुर्गों को भी अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने भी इस मामले पर चिंता जाहिर करते हुए इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, पाकिस्तान की सरकार अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रही है। वहां के स्थानीय आंदोलनकारियों, जैसे कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC), ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके हक नहीं मिलते, तब तक वे इस दमनकारी शासन के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
पाकिस्तान की यह दोगली नीति अब उसके पतन का कारण बनती जा रही है। एक तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार की बात करता है, तो दूसरी तरफ अपने ही लोगों पर जुल्म ढा रहा है। सच तो यह है कि पाकिस्तान की इस नफरती सियासत का खामियाजा जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों से लेकर PoK के निवासियों तक, हर कोई भुगत रहा है, जहाँ सिर्फ भूख, लाचारी और गोलियों का शोर सुनाई देता है।











