Delhi News: दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं में मची बड़ी हलचल के बीच एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व डायरेक्टर जनरल (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल को करोड़ों रुपए के मेडिकल खरीद घोटाले में गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीदारी में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की थीं।
इस पूरे मामले की जांच तब शुरू हुई जब विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) की खरीद प्रक्रियाओं में गंभीर संदिग्ध लेन-देन पकड़े। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दवाइयों और सर्जिकल सामान की खरीद में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। डॉ. अग्रवाल के साथ-साथ डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को भी हिरासत में लिया गया है, जो इस वित्तीय घोटाले में कथित रूप से शामिल थे।
डॉ. वत्सला अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली सरकार के गलियारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस घोटाले की जद कई सौ करोड़ रुपए की सरकारी खरीद तक फैली हो सकती है। फिलहाल एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय मंजूरी और सप्लाई वेरिफिकेशन के दौरान किन-किन चरणों में हेरफेर किया गया और इससे किस निजी संस्था को सीधा लाभ पहुंचाया गया।
बता दें कि डॉ. अग्रवाल पर कार्रवाई पहले ही शुरू हो गई थी, जब उन्हें 21 मई को उनके पद से हटा दिया गया था। इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के स्पष्ट निर्देशों के बाद उन्हें निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया था। उन्हें गुरु तेग बहादुर अस्पताल में पोस्टिंग मिलने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही एसीबी ने उन्हें भ्रष्टाचार के इस मामले में दबोच लिया है।
एसीबी की टीम अब मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बड़े स्कैम में और कौन-कौन से अधिकारी या बाहरी लोग शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं, क्योंकि एजेंसी टेंडर आवंटन और भुगतान से जुड़ी फाइलों को खंगाल रही है।
Author: Shivam Verma
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