Delhi News: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ सम्मेलन के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार का लक्ष्य देश के हर पात्र व्यक्ति को आवास उपलब्ध कराना है। इस प्रतिबद्धता के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास की मुख्यधारा से कोई भी जरूरतमंद वंचित न रहे। मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास अनिवार्य है।
सम्मेलन में देश भर के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ शिवराज चौहान ने विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना की रूपरेखा साझा की, जिसे 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाना है। मनरेगा के विकल्प के रूप में शुरू की जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 95,682 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी मंजूर कर दी है। उन्होंने राज्यों से आह्वान किया कि वे योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं समय सीमा के भीतर पूरी करें।
कार्यक्रम के दौरान ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ का अनावरण भी किया गया, जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 10 लाख करोड़ रुपये का व्यापक बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाएं सही मायनों में सशक्त बनेंगी।
योजनाओं की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए शिवराज चौहान ने सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों के बार-बार होने वाले तबादलों पर चिंता जताते हुए सुझाव दिया कि ग्रामीण विकास से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को कम से कम तीन साल तक एक ही पद पर बने रहना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने सोशल ऑडिट और एआई-आधारित मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाने की बात कही ताकि सरकारी धन का सही इस्तेमाल हो और पारदर्शिता बनी रहे।
अंत में, मंत्री ने जल संरक्षण और बदलते मौसम को देखते हुए राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय ही विकास की कुंजी है। यदि किसी राज्य को किसी विशेष नियम में समस्या आ रही है, तो मंत्रालय वित्त विभाग के साथ चर्चा कर उसमें संशोधन के लिए तैयार है। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
Author: Shivam Verma
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