Hamirpur News: शासन और जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बावजूद जलालपुर थाना क्षेत्र के रिरुवा गांव में अवैध बालू खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनजीटी और शासन के नियमों के अनुसार 30 जून से नदियों से बालू खनन पर पूरी तरह रोक लागू है, लेकिन इसके बावजूद रिरुवा गांव से होकर गुजरने वाली बेतवा नदी में रातभर अवैध खनन किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की गैर मौजूदगी और स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत के चलते बालू माफिया बेखौफ होकर नदी से बालू निकाल रहे हैं और गांव के खलिहानों को अवैध डंपिंग यार्ड में तब्दील कर चुके हैं।
खलिहानों में लगाया गया अवैध बालू का डंप
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की रात रिरुवा गांव के खलिहानों में करीब 100 ट्रॉली अवैध बालू डंप की गई। पूरी रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही से ग्रामीणों की नींद प्रभावित रही। सुबह होते ही खलिहानों में जमा बालू के बड़े-बड़े ढेर अवैध खनन की ओर इशारा करते दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा कारोबार सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है और रात के समय बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया जाता है।
रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक चलता है खनन का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब 9 बजे ममना, पछखुरा, हरसुंडी, पुरैनी और रिरुवा समेत आसपास के गांवों से एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रिरुवा पहुंच जाती हैं। रात 10 बजे के बाद जैसे ही क्षेत्र में सन्नाटा होता है, ट्रैक्टर बेतवा नदी में उतरकर अवैध रूप से बालू निकालना शुरू कर देते हैं।
आरोप है कि यह सिलसिला रात 10 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक लगातार चलता है। निकाली गई बालू को पहले सुरक्षित स्थानों पर डंप किया जाता है और बाद में आसपास के दर्जनों गांवों में मनमाने एवं ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।
पर्यावरण और सरकारी राजस्व पर पड़ रहा असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध बालू खनन से बेतवा नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं बिना वैध अनुमति के हो रहे खनन से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की भी बात कही जा रही है।
एसडीएम की गैर मौजूदगी और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों और जानकारों का आरोप है कि उपजिलाधिकारी सरीला के क्षेत्र में मौजूद न होने का फायदा बालू माफिया और स्थानीय प्रशासन उठा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासनिक अमले की कथित मौन सहमति या मिलीभगत के कारण ही बालू तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे मुख्य रास्तों से बेखौफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ा रहे हैं और रातभर अवैध खनन का काम जारी रखे हुए हैं।
शासन और जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद रिरुवा क्षेत्र में सामने आ रही इन गतिविधियों ने अवैध बालू खनन पर प्रभावी कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: Shivam Verma
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