उत्तराखंड के हरिद्वार में हुए बहुचर्चित भूमि घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नगर निगम की ओर से सराय क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण परियोजना के नाम पर खरीदी गई जमीन के सौदे में करीब 54 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस टीम द्वारा एक साल तक की गई, जिसके बाद अब राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की है।
जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे घोटाले की पटकथा साल 2022 में ही लिख दी गई थी। अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर डंपिंग यार्ड के पास स्थित अनुपयुक्त भूमि को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दाम पर खरीदा। इस प्रक्रिया में फाइलों के हेरफेर से लेकर गलत मूल्यांकन तक, हर स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद हुई कार्रवाई में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों सहित कुल 12 अधिकारी और कर्मचारी निशाने पर हैं। तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति दी गई है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के विरुद्ध मेजर पेनाल्टी यानी गंभीर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस कदम को उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
विजिलेंस की टीम ने पिछले एक साल में तमाम बैंक रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग्स और मूल्यांकन रिपोर्टों को खंगाला है। स्पष्ट हो चुका है कि जमीन का चुनाव परियोजना के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं था, बावजूद इसके करोड़ों का भुगतान किया गया। अब प्रशासन इस पूरी रजिस्ट्री को निरस्त करने और सरकारी राशि की वसूली करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गया है। इसके अलावा, मामले में शामिल अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी जल्द ही कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी खरीद प्रक्रियाओं और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सराय गांव में हुई इस जमीन खरीद के दौरान जिस तरह से कृषि भूमि को व्यावसायिक उपयोग में बदलने और फिर उसे निगम द्वारा ऊंचे दामों पर खरीदने का खेल खेला गया, वह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को दर्शाता है। फिलहाल, इस मामले में हो रही सख्त कार्रवाई ने अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के बीच कड़ा संदेश भेजा है कि राज्य सरकार अब भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
Author: Shivam Verma
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