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Lucknow News: बड़े मंगल की परंपरा और नवाब वाजिद अली शाह की कहानी; जब आस्था ने जोड़ा एक अनोखा रिश्ता

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Lucknow News: ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन हनुमान भक्त बड़े पैमाने पर भंडारे आयोजित करते हैं और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। लखनऊ समेत देश के कई शहरों में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि बड़े मंगल पर भंडारा कराने की शुरुआत एक मुस्लिम शासक, अवध के नवाब मोहम्मद वाजिद अली शाह के समय से मानी जाती है। करीब 200 साल पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

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हनुमान जी और संकटमोचन की महिमा

रामायण में वर्णित कथा के अनुसार, जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाने वाले संकटमोचन बने। हनुमान जी की इसी कृपा और चमत्कारों की कहानियां जनमानस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि उन्हें संकटों को दूर करने वाला देवता माना जाता है।

नवाब वाजिद अली शाह और बड़े मंगल का संबंध

ऐसा कहा जाता है कि बड़े मंगल को व्यापक स्तर पर मनाने और भंडारे की परंपरा की शुरुआत लखनऊ से हुई। यह परंपरा अवध के नवाब मोहम्मद वाजिद अली शाह के समय से जुड़ी हुई है। उस दौर में शुरू हुआ यह आयोजन आज पूरे देश में फैल चुका है, जहां हनुमान मंदिरों में बड़े स्तर पर लंगर और भंडारे आयोजित किए जाते हैं।

कथाओं के अनुसार, एक बार नवाब वाजिद अली शाह के बेटे की तबीयत बेहद खराब हो गई थी। हालत इतनी नाजुक थी कि तमाम इलाजों के बावजूद कोई सुधार नहीं हो रहा था। अपने बेटे को स्वस्थ करने के लिए नवाब हर संभव प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी।

इसी दौरान किसी ने उन्हें सलाह दी कि वह अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में मंगलवार के दिन जाकर प्रार्थना करें। नवाब ने अपनी बेगम के कहने पर इस सलाह को स्वीकार किया और मंदिर पहुंचकर अपने बेटे के स्वास्थ्य के लिए मन्नत मांगी।

कुछ समय बाद उनके बेटे की तबीयत में सुधार होने लगा। इस घटना को नवाब और उनकी बेगम ने चमत्कार के रूप में देखा। अपनी मन्नत पूरी होने पर उन्होंने अलीगंज के उस हनुमान मंदिर का पुनर्निर्माण करवाने का निर्णय लिया। मंदिर का निर्माण कार्य ज्येष्ठ माह में पूरा हुआ।

भंडारे की परंपरा की शुरुआत

मंदिर के पुनर्निर्माण की खुशी में नवाब वाजिद अली शाह ने पूरे लखनऊ में गुड़ का प्रसाद बांटा और इसे एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया गया। यही आयोजन आगे चलकर बड़े मंगल पर भंडारे की परंपरा के रूप में स्थापित हो गया।

समय के साथ यह परंपरा इतनी लोकप्रिय हो गई कि आज लखनऊ में बड़े मंगल के दिन जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जाते हैं। केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न शहरों और हनुमान जी के प्रमुख मंदिरों में भी इस दिन विशाल स्तर पर लंगर चलता है और श्रद्धालु बढ़-चढ़कर इसमें भाग लेते हैं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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