World News: मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पाकिस्तान एक गंभीर संकट की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध या भारी तनाव का सामना करना पड़ सकता है। एक तरफ भारत के साथ सिंधु नदी के जल बंटवारे को लेकर उपजा विवाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को हिलाने के लिए काफी है, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ उसकी सीमा पर बढ़ती तल्खी एक बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा कर रही है।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत का कड़ा रुख पाकिस्तान के लिए चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपनी जल परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है, जिससे पाकिस्तान को अपनी जलापूर्ति कम होने का डर सता रहा है। यदि पानी का संकट गहराता है, तो पाकिस्तान के कई प्रांतों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिससे वहां की आंतरिक स्थिति और अधिक अस्थिर हो सकती है।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब और अधिक हिंसक रूप लेता जा रहा है। अफगानिस्तान में नई सत्ता के आने के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में बार-बार झड़पें हो रही हैं। पाकिस्तान की सेना और अफगानिस्तान के लड़ाकों के बीच होने वाली यह गोलीबारी इस बात का संकेत है कि पाक की पश्चिमी सीमा अब सुरक्षित नहीं रही है, जिससे सेना पर दबाव काफी बढ़ गया है।
अगर भारत के साथ पानी के मुद्दे पर तनाव बढ़ता है और पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान से टकराव चरम पर पहुंचता है, तो पाकिस्तान के लिए एक साथ दो मोर्चों को संभालना नामुमकिन साबित हो सकता है। देश की पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था ऐसे किसी भी सैन्य टकराव या युद्ध के प्रभाव को झेलने में सक्षम नहीं है। यह दो-तरफा दबाव पाकिस्तान को भविष्य में एक बड़े कूटनीतिक और सैन्य जाल में फंसा सकता है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की गलत नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते संबंधों का खामियाजा अब उसे भुगतना पड़ सकता है। अगर समय रहते पाकिस्तान ने कूटनीतिक रास्तों का चयन नहीं किया और पड़ोसियों के साथ अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश नहीं की, तो आने वाले दिन उसके अस्तित्व के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होंगे। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान इस दोहरे दबाव से कैसे निकलता है।
Author: Shivam Verma
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