प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए आधुनिक दुनिया में शक्ति के बदलते स्वरूप पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इक्कीसवीं सदी के इस दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही ताकत के नए और मुख्य स्रोत बन चुके हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, असली महत्व इस बात का नहीं है कि नियंत्रण किसके हाथ में है, बल्कि इसका है कि उस शक्ति का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘पावर टू एम्पावर’ यानी सशक्तिकरण की शक्ति के विचार को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियंत्रण या केवल प्रतिस्पर्धा की भावना से आगे बढ़कर सहयोग और दूसरों को सफल बनाने की सोच ही नए युग की सबसे बड़ी ताकत है। तकनीक का इस्तेमाल चुनिंदा लोगों को आगे बढ़ाने के बजाय करोड़ों आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए होना चाहिए।
भारत का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में डिजिटल क्रांति और इंटरनेट की सुलभता ने आम आदमी की तकदीर बदली है। साल 2014 के बाद सरकार ने मोबाइल डेटा को सस्ता और हर नागरिक की पहुंच में बनाने के लिए विशेष कदम उठाए, जिसके परिणामस्वरूप आज देश के दूर-दराज के गांवों में बैठा एक छोटा दुकानदार भी डिजिटल माध्यम से सीधे अपने ग्राहकों से जुड़ पा रहा है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंचों और भारत की पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि देश हमेशा से ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में सुधार की रफ्तार निरंतर तेज है और सरकार के लिए रिफॉर्म्स कोई मजबूरी नहीं बल्कि एक मजबूत और अडिग विश्वास का प्रतीक हैं।










