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Ram Mandir Case: 10 करोड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, SIT ने 200 लोगों की सूची बनाई, जांच का दायरा बढ़ा

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Ram Mandir Case: रामनगरी अयोध्या में स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाते हुए लगभग 200 लोगों की सूची तैयार की है, जिनसे पूछताछ की जानी है। जांच के केंद्र में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था शामिल हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ रही है।

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टिन्नू यादव के बाद जांच का फोकस पूरे सिस्टम पर

मामले के शुरुआती चरण में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम प्रमुखता से सामने आया था। हालांकि, अब जांच एजेंसियां केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं। SIT उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है जिनके जिम्मे मंदिर परिसर की सुरक्षा, निगरानी और प्रवेश व्यवस्था की जिम्मेदारी थी।

इसी क्रम में तकनीकी विभाग के कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतने बड़े और संवेदनशील परिसर में किसी भी प्रकार की अनियमितता बिना लापरवाही या व्यापक स्तर की चूक के संभव नहीं हो सकती।

RMO अधिकारी की भूमिका पर भी नजर

जांच के दौरान रेडियो मेंटिनेंस ऑफिसर (RMO) के पद पर तैनात एक अधिकारी का मामला भी चर्चा में आया है। यह अधिकारी मंदिर परिसर की सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालता है। जानकारी के अनुसार, वह पिछले 17 वर्षों से इसी संवेदनशील स्थान पर कार्यरत है।

SIT अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती के पीछे क्या कारण रहे। जांच टीम ने सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली, बैकअप सिस्टम, डेटा स्टोरेज हार्ड डिस्क और तकनीकी कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है। डिजिटल रिकॉर्ड और पेन ड्राइव की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैसे हुई चूक?

राम मंदिर देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, कई स्तरों की सुरक्षा जांच, मेटल डिटेक्टर और विशेष सुरक्षा बल तैनात हैं। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या हेराफेरी हुई, तो वह इतनी सघन निगरानी व्यवस्था के बावजूद कैसे संभव हुई।

जांच एजेंसियां इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि कहीं निगरानी व्यवस्था में कोई तकनीकी या मानवीय चूक तो नहीं हुई, अथवा सुरक्षा तंत्र के भीतर ही कोई ऐसा कमजोर बिंदु मौजूद था जिसका फायदा उठाया गया।

VIP पास व्यवस्था भी जांच के घेरे में

जांच की आंच अब उस व्यवस्था तक पहुंच गई है जिसके माध्यम से मंदिर परिसर में विशेष डिजिटल पास जारी किए जाते हैं। SIT पिछले कुछ महीनों के दौरान जारी किए गए विशेष पासों का रिकॉर्ड खंगाल रही है।

जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि किन लोगों को विशेष अनुमति दी गई, किन नियमों के तहत पास जारी हुए और प्रवेश एवं निकास से संबंधित प्रक्रियाओं का पालन किस स्तर तक किया गया। कुछ विशेष व्यक्तियों के आवागमन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज का भी मिलान किया जा रहा है।

11 महीनों में सुरक्षा पर खर्च हुए लगभग 10 करोड़ रुपये

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा व्यवस्था पर हुआ भारी खर्च भी है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 11 महीनों में मंदिर परिसर की सुरक्षा और रखरखाव पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इस राशि का उपयोग सुरक्षा उपकरणों की खरीद, हाई-टेक कैमरों की स्थापना और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए किया गया था। ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी जानने का प्रयास कर रही हैं कि भारी निवेश के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक कैसे सामने आई।

वायरल वीडियो की भी हो रही जांच

मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब सोशल मीडिया पर दान की राशि की गिनती से जुड़ा एक कथित वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में कुछ लोग नोटों के बंडल गिनते दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि, SIT इस वीडियो को केवल सामान्य रिकॉर्डिंग मानकर नहीं चल रही है। जांच एजेंसियां वीडियो के साथ-साथ उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, डेटा स्टोरेज सिस्टम और कथित रूप से डिलीट हुए फुटेज की भी जांच कर रही हैं। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

200 लोगों की सूची, 125 से अधिक के बयान दर्ज

SIT ने जांच के लिए लगभग 200 लोगों की सूची तैयार की है। इनमें मंदिर परिसर से जुड़े कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, तकनीकी स्टाफ और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं।

अब तक 125 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। कई व्यक्तियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है ताकि उनके पुराने और नए बयानों का मिलान किया जा सके। टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की जा चुकी है।

ट्रस्ट की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अध्ययन

जांच एजेंसियां मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के बंटवारे का भी अध्ययन कर रही हैं। इसके तहत विभिन्न पदाधिकारियों के कार्यक्षेत्रों और जिम्मेदारियों को समझा जा रहा है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णयों का नेतृत्व करते हैं। महासचिव चंपतराय ऑडिट समिति और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े कार्य देखते हैं। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी संभालते हैं।

इसी प्रकार सदस्य नृपेंद्र मिश्र मंदिर निर्माण समिति की देखरेख करते हैं, जबकि स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामलों का दायित्व निभाते हैं। डॉ. अनिल कुमार मिश्र प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालते हैं और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव दर्शन व्यवस्था, आरती पास और दैनिक संचालन से जुड़े कार्यों का प्रबंधन देखते हैं।

जांच एजेंसियां यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि व्यवस्था के किस स्तर पर कोई ऐसा कमजोर बिंदु मौजूद था, जिसका लाभ उठाया गया हो सकता है।

श्रद्धालुओं में बढ़ी चिंता

मामले को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भी चिंता का माहौल है। देशभर से अयोध्या पहुंचने वाले भक्तों का कहना है कि रामलला के मंदिर जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक आस्था के केंद्र में किसी भी प्रकार की अपारदर्शिता या अनियमितता के आरोप गंभीर हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए।

जांच के अगले चरण पर सबकी नजर

जांच के चौथे दिन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। SIT सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सहित पूरे तंत्र की व्यापक जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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