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Business News: स्मार्टफोन और टीवी महंगे होने के बाद भी खरीदारी में रिकॉर्ड उछाल, कंज्यूमर लोन ने पार की नई सीमा

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Business News: भारतीय बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बावजूद, आम ग्राहकों की खरीदारी में कोई कमी नहीं आई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्टफोन, फ्रिज और टेलीविजन जैसे उपकरणों के दाम बढ़ने के बाद भी इनकी मांग में जबरदस्त तेजी देखी गई है। दिलचस्प बात यह है कि जून तिमाही के दौरान कंज्यूमर फाइनेंसिंग ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने महंगे गैजेट्स खरीदने के लिए आसान किस्तों यानी ईएमआई (EMI) का सहारा लिया है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में पिछले छह महीनों के भीतर 12 से 40 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इसके पीछे की मुख्य वजह कमोडिटी की कीमतों में उछाल और मेमोरी चिप की वैश्विक स्तर पर बढ़ती लागत बताई जा रही है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी उपभोक्ता इन गैजेट्स से समझौता नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी खरीदारी को जारी रखने के लिए बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) से लिए जाने वाले लोन पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी इक्विफैक्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में मई के अंत तक कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन का बकाया आंकड़ा 1.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। पहले यह आंकड़ा 1.09 लाख करोड़ रुपये था, जो स्पष्ट करता है कि लोगों में क्रेडिट पर सामान खरीदने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एनबीएफसी सेक्टर ने भी छोटे शहरों में अपने पैर पसारते हुए कंज्यूमर फाइनेंसिंग को और अधिक सुलभ बना दिया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बनी हुई है।

खरीदारी के बदलते तरीके पर गौर करें तो अब फाइनेंसिंग की अवधि को भी ग्राहकों की सुविधा के अनुसार काफी लचीला बना दिया गया है। स्मार्टफोन के लिए किस्तों का समय अब 12 महीने से बढ़ाकर 15 महीने कर दिया गया है, जबकि टीवी, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे उपकरणों के लिए यह अवधि 24 महीने तक पहुंच गई है। यह बदलाव आम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना आसान बना रहा है, क्योंकि लंबी अवधि के कारण मासिक किस्त का बोझ काफी कम हो गया है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में थोड़ी गिरावट जरूर दिखी, लेकिन फाइनेंसिंग के जरिए होने वाली बिक्री का हिस्सा 35 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में भी फाइनेंसिंग ही कंज्यूमर मार्केट की रफ्तार को बनाए रखेगी। अब आम ग्राहक नकद खर्च करने के बजाय क्रेडिट आधारित पेमेंट विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो भारतीय रिटेल बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो रहा है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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