War Exercise 2026: भारत और अमेरिका के बीच चल रहे बहुप्रतीक्षित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के दौरान भारतीय सेना के प्रशिक्षित स्वान दस्तों ने अपने बेहतरीन कौशल और फुर्ती से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों से लेकर राजस्थान की चुनौतीपूर्ण फील्ड फायरिंग रेंज तक आयोजित हो रहे इस 22वें संस्करण में दोनों देशों के सैनिक आधुनिक युद्ध कला का अभ्यास कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय सेना के विशेष रूप से प्रशिक्षित चार डॉग्स ने अमेरिकी सेना के जवानों के सामने अपनी सामरिक क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया।
इस विशेष दल में शामिल राइस, विक्टर, जैक और राउडी नामक चारों श्वानों ने विभिन्न जटिल ऑपरेशन्स में सैनिकों की सहायता करने की अपनी अद्वितीय क्षमता का परिचय दिया। अभ्यास के दौरान इन जांबाज डॉग्स ने किसी संदिग्ध ठिकाने में अत्यंत सावधानी से प्रवेश करने और रस्सी के सहारे सुरक्षित नीचे उतरने जैसे कठिन करतब दिखाए। इस लाइव प्रदर्शन को देखकर अमेरिकी सैनिकों को भारतीय सेना के इन चार-पांव वाले सिपाहियों की कड़ी ट्रेनिंग और विषम परिस्थितियों में तालमेल बिठाने के हुनर को बेहद करीब से देखने का अवसर मिला।
इन सैन्य डॉग्स की नस्लों की बात करें तो इनमें विविधता देखने को मिलती है, जो सेना की आधुनिक रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। राउडी और विक्टर पूरी तरह से स्वदेशी रामपुर हाउंड नस्ल के हैं, जिनका इस्तेमाल भारतीय सेना द्वारा सुरक्षा अभियानों में लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा जैक बेल्जियन मैलिनॉइस और राइस लैब्राडोर रिट्रीवर नस्ल से ताल्लुक रखते हैं। इन सभी अनुभवी श्वानों को पहले भी देश की उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर महत्वपूर्ण अभियानों में तैनात किया जा चुका है, जहां इन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है।
इससे पहले रामपुर हाउंड नस्ल के डॉग्स ने उमरोई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में अपनी ताकत दिखाई थी, जिसके बाद उन्हें मणिपुर सीमा पर आईईडी का सफलतापूर्वक पता लगाने के लिए तैनात किया गया था। वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी इनके साथियों ने जालंधर और अमृतसर सेक्टरों में अहम भूमिका निभाई थी। युद्ध अभ्यास 2026 में इनकी सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक युद्ध में प्रशिक्षित डॉग्स और उनके हेंडलर्स के बीच का तालमेल सामरिक सफलता के लिए कितना जरूरी है।
आपको बता दें कि इस महाअभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों पक्षों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस बार के अभ्यास में रक्षा तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां सैनिक दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और सामरिक टोह लेने के लिए आधुनिक ड्रोन और अत्याधुनिक स्वायत्त प्रणालियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। स्वदेशी डॉग्स का यह शानदार प्रदर्शन भारत की रक्षात्मक आत्मनिर्भरता और विविधता को भी मजबूती से दुनिया के सामने पेश कर रहा है।
Author: Shivam Verma
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